एसआइआर सुनवाई केंद्र में बीएलए या किसी भी राजनीतिक दल के प्रतिनिधियों की मौजूदगी नहीं होगी
संवाददाता, कोलकाताराज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के तहत चल रही सुनवाई प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह के राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. आयोग ने राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीइओ) मनोज अग्रवाल को निर्देश दिया है कि सुनवाई केंद्र में बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) या किसी भी राजनीतिक दल के प्रतिनिधि की मौजूदगी नहीं होगी. गौरतलब है कि यह सुनवाई एसआइआर की तीन चरणों वाली प्रक्रिया का दूसरा चरण है. आयोग का यह निर्देश ऐसे समय आया है, जब हुगली और कूचबिहार जिलों में सुनवाई सत्र बाधित होने की घटनाएं हुई हैं. इन जगहों पर तृणमूल कांग्रेस के तीन विधायकों ने सुनवाई सत्रों में दखल देकर उन्हें जबरन बंद कराया था. इन विधायकों ने सुनवाई केंद्र में अपनी पार्टी के बीएलए की मौजूदगी की मांग की थी. इसी मांग को लेकर विवाद बढ़ा था और सुनवाई प्रक्रिया बंद कर दी गयी थी. चुनाव आयोग ने सीइओ को निर्देश दिया है कि वह इस संबंध में बिना देर किये डीएम को स्पष्ट आदेश भेज दें. यदि किसी भी जिले में सुनवाई सत्र को जबरन रोकने या उसमें हस्तक्षेप की कोशिश होती है, तो तत्काल जरूरी कार्रवाई की जाये. यह सुनवाई प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाये रखने के लिए बेहद अहम है. उल्लेखनीय है कि, चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस की उस मांग को खारिज कर दिया था, जिसमें पार्टी ने बीएलए को सुनवाई केंद्र में शामिल करने की बात कही थी. आयोग ने स्पष्ट किया था कि यदि एक दल को यह अनुमति दी जाती है, तो राज्य में पंजीकृत अन्य सभी राजनीतिक दलों को भी यही अधिकार देना पड़ेगा. आयोग के अनुसार, ऐसी स्थिति में हर एक सुनवाई टेबल पर ईआरओ, एईआरओ, माइक्रो ऑब्जर्वर और अलग-अलग दलों के आठ बीएलए होंगे. कुल मिला कर एक टेबल पर लगभग 11 लोगों की मौजूदगी होगी. ऐसे में सुनवाई करना असंभव होगा. उल्लेखनीय है कि, एसआइआर के तहत 58 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाये गये हैं. इसमें करीब 24 लाख मृत मतदाता हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
