स्वास्थ्य साथी कार्ड का मामला, निजी अस्पताल के खिलाफ जांच का आदेश

एक दिव्यांग शख्स को अपनी बीमार पत्नी के इलाज के लिए अपने स्वास्थ्य साथी कार्ड का इस्तेमाल करते समय अत्यधिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा.

संवाददाता, कोलकाता

एक दिव्यांग शख्स को अपनी बीमार पत्नी के इलाज के लिए अपने स्वास्थ्य साथी कार्ड का इस्तेमाल करते समय अत्यधिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा. अब इस मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप करते हुए पुलिस को घटना की जांच करने का आदेश दिया है. हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने पुलिस को निजी अस्पताल के खिलाफ शीघ्र जांच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है. याचिकाकर्ता के वकील जयंत नारायण चट्टोपाध्याय ने बताया कि बारासात निवासी वकील गौरांग पाल, जो दिव्यांग हैं, ने अपनी पत्नी को किडनी की जटिल समस्या के कारण एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था. पति-पत्नी दोनों के पास स्वास्थ्य साथी कार्ड हैं. कथित तौर पर, कार्ड दिखाने के बाद, मरीज को शुरू में भर्ती कर लिया गया. लेकिन कुछ दिनों बाद अस्पताल के अधिकारियों ने कहा कि स्वास्थ्य साथी के तहत सेवाएं उपलब्ध नहीं होंगी. आखिरकार, गौरांग पाल ने अपनी पत्नी को उस अस्पताल से डिस्चार्ज करवा कर कोलकाता के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया. लेकिन उसके बाद भी, बारासात स्थित निजी अस्पताल से गौरांग पाल को इलाज का लाखों का बिल भेज दिया गया. आरोप है कि निजी अस्पताल द्वारा जो सेवाएं प्रदान नहीं की गयी, उसका भी उल्लेख करते हुए लाखों रुपये का बिल भेजा गया. इतना ही नहीं, यह भी आरोप है कि जब इस मामले को लेकर स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करायी गयी, तो उसे स्वीकार नहीं किया गया. बाद में, निचली अदालत के आदेश पर शिकायत दर्ज की गयी, लेकिन पुलिस ने जांच में कोई दिलचस्पी नहीं दिखायी.

इसके बाद गौरांग पाल ने हाइकोर्ट का रुख किया, जिस पर बुधवार को सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ने पुलिस को जांच कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया.

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By AKHILESH KUMAR SINGH

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