विजय दिवस पर भारतीय सेना के पूर्वी कमान ने युद्ध नायकों को दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि

विजय दुर्ग में पुष्पांजलि समारोह आयोजित

विजय दुर्ग में पुष्पांजलि समारोह आयोजित

कोलकाता. 54 वें विजय दिवस 2025 के अवसर पर मंगलवार को भारतीय थल सेना के पूर्वी कमान ने कोलकाता स्थित मुख्यालय विजय दुर्ग (फोर्ट विलियम) में एक गरिमामय और भावनात्मक पुष्पांजलि समारोह का आयोजन कर 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध में भारतीय सेना के शहादत देने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की. यह समारोह बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शूरवीरों के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को नमन करने के लिए आयोजित किया गया. श्रद्धा और कृतज्ञता से परिपूर्ण इस समारोह ने 1971 के ऐतिहासिक युद्ध में भारतीय सशस्त्र बलों की निर्णायक जीत और भारत-बांग्लादेश के बीच साझा बलिदान से बने अटूट मित्रता संबंधों की याद दिलायी. कार्यक्रम में बांग्लादेश से आये प्रतिनिधिमंडल, 1971 युद्ध के दिग्गज, वीरता पुरस्कार से सम्मानित सैनिक, सेवारत सैन्यकर्मी, पूर्व सैनिक और विशिष्ट असैनिक अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही.समारोह के दौरान कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों व गणमान्य लोगों ने पुष्पचक्र अर्पित किये. इनमें बंगाल सब एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल राजेश अरुण मोघे, ईस्टर्न कमांड मुख्यालय के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल मोहित मल्होत्रा, बांग्लादेश सैन्य प्रतिनिधिमंडल की ओर से ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद लुत्फोर रहमान तथा बांग्लादेश के मुक्ति योद्धा के वरिष्ठतम सदस्य और ‘वीर प्रतीक’ से सम्मानित मोहम्मद हबीबुल आलम शामिल रहे. इसके अलावा इंडियन ईस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ एयर मार्शल सूरत सिंह, पूर्व वरिष्ठ सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल गुरबख्श सिंह सिहोता और लेफ्टिनेंट जनरल जेआर मुखर्जी, ईस्टर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल आरसी तिवारी तथा मिजोरम के राज्यपाल जनरल डॉ वीके सिंह भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे. समारोह में महत्वपूर्ण क्षण यह भी रहा, जब पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ सीवी आनंद बोस ने अंतिम पुष्पचक्र अर्पित किया. इसके बाद सेना के एविएशन हेलीकॉप्टरों द्वारा पुष्पवर्षा की गयी, जो अमर शहीदों की शाश्वत स्मृति और सम्मान का प्रतीक बनी. सभा को संबोधित करते हुए राज्यपाल डॉ सीवी आनंद बोस ने भारत और बांग्लादेश के वीर जवानों और पूर्व सैनिकों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि इन शूरवीरों के बलिदान, साहस और अडिग संकल्प ने करोड़ों लोगों की आकांक्षाओं को स्वर दिया और एक स्वतंत्र बांग्लादेश के जन्म का मार्ग प्रशस्त किया. उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत, बांग्लादेश को मान्यता देने वाला पहला देश बना, जिससे आपसी सम्मान, विश्वास और सहयोग पर आधारित मजबूत द्विपक्षीय संबंधों की नींव पड़ी. भारतीय सेना के पूर्वी कमान के लिए यह अवसर विशेष महत्व रखता है, क्योंकि 1971 के युद्ध में इस कमान ने निर्णायक और ऐतिहासिक भूमिका निभायी थी. विजय दिवस हर वर्ष 16 दिसंबर को मनाया जाता है. यह दिन वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारत की ऐतिहासिक जीत का प्रतीक है, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश, जो पहले पूर्वी पाकिस्तान था, स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आया. इसी दिन 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था, जिसने युद्ध का अंत किया और भारत की निर्णायक विजय सुनिश्चित की. विजय दिवस का यह आयोजन भारतीय सेना के पूर्वी कमान की गौरवशाली परंपरा, साहस, पेशेवर दक्षता और राष्ट्र के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को एक बार फिर सशक्त रूप से रेखांकित करता है.

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Published by: Sandip tiwari

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