तृणमूल छोड़ने वाले बंगाल के 20 सांसदों को ओम बिरला ने जवाब देने के लिए दिये 21 दिन

Om Birla on NCPI: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर एनसीपीआई में शामिल हुए 20 सांसदों को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता के मामले में जवाब देने के लिए 21 दिन का समय दिया है. यह नोटिस तृणमूल महासचिव अभिषेक बनर्जी की याचिका पर जारी किया गया था. पढ़ें पूरी खबर.

Om Birla on NCPI: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराये जाने की मांग को लेकर तृणमूल कांग्रेस की ओर से दायर याचिकाओं के संबंध में नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में ‘शामिल होने वाले’ 20 सांसदों को जवाब देने के लिए 22 सितंबर तक का समय दिया है. एनसीपीआई सांसदों द्वारा 26 अगस्त को जारी अध्यक्ष के नोटिस का जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था. स्पीकर ने उनकी अपील मान ली और 21 दिन का समय दे दिया. नोटिस में सांसदों से 7 दिन के भीतर जवाब मांगा गया था.

जून में ममता का साथ छोड़ एनसीपीआई में शामिल हो गये थे 20 सांसद

ओम बिरला ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी द्वारा इन सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग वाली याचिकाएं दायर किये जाने के बाद नोटिस जारी किये थे. इन 20 सांसदों पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल की हार के बाद जून महीने में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी छोड़कर एनसीपीआई में शामिल होने की घोषणा की थी.

अभिषेक की याचिका पर ओम बरला ने 25 अगस्त को दिया था नोटिस

बिरला ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 25 अगस्त को अभिषेक बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताने के बाद नोटिस जारी किये थे, जिसमें बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की याचिकाओं पर अध्यक्ष से जल्द फैसला लेने का अनुरोध किया गया था. चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहन की पीठ ने बनर्जी की याचिका पर 20 सांसदों को नोटिस जारी किया था और स्पीकर के समक्ष चल रही अयोग्यता की कार्यवाही पर जल्द से जल्द कार्रवाई करने का निर्देश दिया था.

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टीएमसी के बागी सांसदों से स्पीकर ने 7 दिन में मांगा था जवाब

अभिषेक बनर्जी ने जून महीने में लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अलग-अलग याचिकाएं दायर कर तृणमूल छोड़कर एनसीपीआई के साथ जाने वाले सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की थी. इसके बाद अध्यक्ष के नोटिस में सांसदों से 7 दिन के भीतर अपना जवाब देने को कहा गया था.

अतिरिक्त समय मिलने से बागी सांसदों को मिली राहत

सूत्रों ने बताया कि अतिरिक्त समय मिलने से बागी गुट को कुछ राहत मिली है. अब यह गुट अयोग्य ठहराने की कार्यवाही के कानूनी एवं राजनीतिक प्रभावों पर विचार कर रहा है. सूत्रों का कहना है कि ये सांसद दलबदल विरोधी प्रावधानों के प्रावधानों और अध्यक्ष के समक्ष रखे जाने वाले तर्कों पर कानूनी राय ले रहे हैं.

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सांसदों ने मांगा था 3 सप्ताह का समय

बागी गुट के वरिष्ठ नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने मंगलवार को बताया था कि लोकसभा सचिवालय से जारी नोटिस का जवाब देने के लिए सांसदों ने तीन सप्ताह का समय मांगा था. बागी सांसदों को नोटिस के साथ स्पीकर सेक्रेटेरियट से 18 जून की याचिका की प्रति भी भेजी गयी थी.

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