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OBC: कोलकाता. पश्चिम बंगाल की नयी सरकार ने सत्ता में आने के बाद ही पूर्ववर्ती सरकार द्वारा लागू किये गये ओबीसी आरक्षण की तालिका को रद्द कर दिया है और राज्य में नये ओबीसी आरक्षण तालिका प्रकाशित करने की घोषणा की है. इसके साथ ही राज्य सरकार ने हाल ही में ओबीसी तालिका में शामिल जाने वाले श्रेणी का नाम भी प्रकाशित किया है. इसी दिशा में सोमवार को राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधायकों को अन्य पिछड़ा वर्ग या ओबीसी की तालिका की जांच करने को लेकर खास निर्देश दिये हैं.
सभी ओबीसी सर्टिफिकेट की होगी जांच
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य सचिवालय नबान्न भवन में पार्टी के 26 विधायकों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की. इस बैठक में सिलीगुड़ी, पुरुलिया, बर्दवान, उत्तर 24 परगना समेत कई जिलों के विधायकों को बुलाया गया था. इस बैठक में ओबीसी तालिका को लेकर प्रस्तावित सर्वे पर चर्चा हुई. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि 2011 से जारी सभी ओबीसी सर्टिफिकेट की जांच की जायेगी. अब इसे लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि हर विधायक को अपने इलाके में नये सिरे से सर्वे करना होगा और चार महीने के अंदर यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी. उस सर्वे के बाद कौन किस जाति/जनजाति का है, इसकी तालिका बनानी होगी.
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पुरानी ओबीसी आरक्षण पॉलिसी रद्द
गौरतलब है कि ममता बनर्जी के कार्यकाल के दौरान बनायी गयी ओबीसी आरक्षण पॉलिसी को रद्द कर दिया गया है. तृणमूल सरकार के कार्यकाल के दौरान ओबीसी आरक्षण को सात प्रतिशत से बढ़ाकर 17 प्रतिशत कर दिया गया था. कई मुस्लिम समुदाय के नाम ओबीसी आरक्षण तालिका में शामिल किये गये थे, जिसे लेकर कलकत्ता हाइकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक केस फाइल किये गये. हाइकोर्ट ने 2010 के बाद जारी सभी ओबीसी प्रमाण पत्र रद्द करने का आदेश दिया है. हाइकोर्ट के आदेशानुसार, अब राज्य की नयी सरकार ने तालिका बनाने की कवायद शुरू की है.
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