कोलकाता. मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी से जुड़े रोगों के बढ़ते मामलों तथा सर्जरी की आधुनिक तकनीकों से उपचार के बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं. इस विषय पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में न्यूरोसर्जन और रीढ़ विशेषज्ञ डॉ अनिंद्या बसु और डॉ मिलिंद देवगांवकर ने मस्तिष्क व रीढ़ संबंधी विकारों के बढ़ते बोझ और शल्य चिकित्सा तकनीकों में तेजी से हो रही प्रगति पर विस्तार से चर्चा की. विशेषज्ञों के नेतृत्व में हुई इस चर्चा में शुरुआती लक्षणों की पहचान, विकसित हो रहे उपचार विकल्पों तथा पारंपरिक ओपन सर्जरी से हटकर न्यूनतम इनवेसिव और प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रक्रियाओं की ओर बढ़ते रुझान पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया. चिकित्सा सत्र की शुरुआत में विशेषज्ञों ने मस्तिष्क और रीढ़ से जुड़ी समस्याओं के शुरुआती चेतावनी संकेतों को पहचानने की आवश्यकता पर जोर दिया. इनमें लगातार पीठ दर्द, कमजोरी, सुन्नता, असंतुलन, लंबे समय तक रहने वाला सिरदर्द तथा बोलने या देखने में बदलाव जैसे लक्षण शामिल हैं. उन्होंने कहा कि समय रहते विशेषज्ञ से परामर्श और सही निदान होने पर उपचार की सफलता और मरीज की जीवन गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव है. पैनल ने वर्तमान में उपलब्ध उपचार विकल्पों की विस्तृत श्रृंखला पर भी चर्चा की. इसमें रूढ़िवादी प्रबंधन, न्यूनतम इनवेसिव स्पाइन सर्जरी और उन्नत मस्तिष्क सर्जरी तकनीकें शामिल हैं. विशेषज्ञों के अनुसार उपचार का निर्णय हर मरीज के लिए अलग होता है और यह उसकी बीमारी की स्थिति, समग्र स्वास्थ्य तथा रोग की गंभीरता पर निर्भर करता है.
मस्तिष्क की सर्जरी में नयी तकनीक से इलाज सुरक्षित
मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी से जुड़े रोगों के बढ़ते मामलों तथा सर्जरी की आधुनिक तकनीकों से उपचार के बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं.
