NEET Paper Leak 2026 Case: NEET-2026 की परीक्षा में हुई कथित धांधली और पेपर लीक के विरोध में देशभर में छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने पेपर लीक माफिया पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सख्त रुख अपनाने के बाद केंद्रीय कैबिनेट ने ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मींस) एक्ट, 2024’ में संशोधन वाले नये विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है.
फास्ट ट्रैक कोर्ट में जल्द पूरी होगी सुनवाई
इस विधेयक का सबसे अधिक प्रभाव उन राज्यों पर पड़ेगा, जहां परीक्षा में धांधली से जुड़े मामले अदालतों में लंबित हैं. इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल के परीक्षार्थियों और अभिभावकों के लिए अच्छी खबर यह है कि कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) में भी इस मामले की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast-Track Court) बनाये जा रहे हैं.
कलकत्ता समेत 4 उच्च न्यायालयों में बनेंगे स्पेशल कोर्ट
केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा है कि नीट (NEET) पेपर लीक से जुड़े मामलों में आरोपियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए सरकार विशेष न्यायिक ढांचा तैयार कर रही है. सरकार ने बॉम्बे, दिल्ली, मध्यप्रदेश और कलकत्ता हाईकोर्ट में पेंडिंग केसेज को ध्यान में रखते हुए इन राज्यों में तुरंत फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का निर्देश दिया है. इसका मुख्य उद्देश्य लंबित याचिकाओं पर बिना किसी विलंब के दैनिक आधार पर सुनवाई कर फैसले तक पहुंचना है, ताकि छात्रों का एक भी शैक्षणिक वर्ष बर्बाद न हो.
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10 साल की सजा और 10 करोड़ का जुर्माना
संशोधित कानून में संगठित अपराध और पेपर लीक में शामिल गिरोहों के लिए सजा के प्रावधानों को अत्यधिक सख्त बना दिया गया है. दोषी पाये जाने वाले व्यक्तियों और माफिया नेटवर्क के सदस्यों के लिए न्यूनतम जेल की अवधि को 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दिया गया है, जिसे अधिकतम 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है. पेपर लीक का कारोबार करने वाले माफियाओं की कमर तोड़ने के लिए 10 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है.
परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों पर भी कसी नकेल
परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों, सेवा प्रदाताओं या अधिकारियों की मिलीभगत पाये जाने पर भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई का कानूनी वैधानिक आधार (Statutory Backing) तैयार किया गया है.
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2 महीने के भीतर चार्जशीट, 5 महीने में कार्रवाई पूरी
पेपर लीक मामले की जांच पूरी करने की टाइमलाइन भी नये कानून में तय कर दी गयी है. अब तक पेपर लीक के मामले वर्षों तक अदालती प्रक्रियाओं में उलझे रहते थे. इस ढिलाई को खत्म करने के लिए कानून में समय-सीमा तय कर दी गयी है.
- जांच की समय-सीमा तय : पुलिस या केंद्रीय जांच एजेंसी को एफआईआर (FIR) दर्ज होने के 2 महीने के भीतर जांच पूरी कर आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल करना अनिवार्य होगा.
- ट्रायल की समय-सीमा : फास्ट ट्रैक कोर्ट को आरोप पत्र दाखिल होने के 3 महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर अंतिम फैसला सुनाना होगा.
- 5 महीने में दोषी को सजा : यानी कुल 5 महीने के भीतर पूरे मामले का निपटारा कर दोषियों को जेल भेजा जायेगा.
छात्रों और अभिभावकों को राहत की उम्मीद
पश्चिम बंगाल और आसपास के राज्यों से लाखों छात्र हर साल नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में बैठते हैं. पिछले कुछ समय से परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के कारण छात्रों का मनोबल प्रभावित हुआ था. कलकत्ता हाईकोर्ट में विशेष अदालत के गठन और नये कानून से न केवल मामलों का तेजी से निपटारा होगा, बल्कि भविष्य में किसी भी परीक्षा में नकल या पेपर लीक करने वाले माफिया और गिरोहों में खौफ पैदा होगा. सरकार का यह नया विधेयक संसद के आगामी सत्र में पेश होने जा रहा है.
