जरूरतमंद बच्चों की होगी रीढ़ की हड्डी की सर्जरी

ये वे बच्चे हैं, जो आर्थिक तंगी और जटिल इलाज की अनुपलब्धता के कारण अपना संपूर्ण जीवन विकलांगता के साथ बिताने को मजबूर हैं.

कोलकाता. जगन्नाथ गुप्ता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड हॉस्पिटल (जेआइएमएसएच) ने भारत में रीढ़ की हड्डी की विकृति सुधारने के क्षेत्र में नयी पहल की है. इसके तहत दुनियाभर के प्रसिद्ध रीढ़ विशेषज्ञ और चिकित्सा एक मंच पर आ रहे हैं. इनमें डॉ अलाअलदीन अहमद (फिलिस्तीन), प्रोफेसर डॉ. मैसिमो बालसानो (इटली), डॉ गिरीश स्वामी (यूके), डॉ नवीन सी मुरली (एनेस्थीसियोलॉजिस्ट, बर्मिंघम) और यूके से जैकलीन क्रिचली, चेरी, जाद्जी प्रोमिल्डा और सर्जियो सेक्केली शामिल हैं. ये सभी विशेषज्ञ कोलकाता स्थित जेआइएमएसएच में एकत्र हो रहे हैं. ये ऐसे बच्चों की जटिल सर्जरी करेंगे, जो स्कोलियोसिस सहित अन्य गंभीर रीढ़ की विकृतियों से पीड़ित हैं. ये वे बच्चे हैं, जो आर्थिक तंगी और जटिल इलाज की अनुपलब्धता के कारण अपना संपूर्ण जीवन विकलांगता के साथ बिताने को मजबूर हैं. मेडिकल कॉलेज में तीन से आठ मार्च के बीच आयोजित पांचवां कोलकाता स्पाइन डिफॉर्मिटी के दौरान उक्त बच्चों की सर्जरी की जायेगी. क्या है स्कोलियोसिस: स्कोलियोसिस एक गंभीर बीमारी है, जो आमतौर पर बचपन या किशोरावस्था के दौरान विकसित होती है. इसमें रीढ़ की हड्डी की सभी 33 हड्डियां टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती हैं. इसे ठीक करने के लिए छह से 10 घंटे तक की जटिल और सटीक सर्जरी की आवश्यकता होती है. इस अस्पताल में भारत के अलग-अलग हिस्सों से आए 11 बच्चों की सर्जरी की जायेगी, जो गंभीर स्कोलियोसिस और रीढ़ की विकृति से जूझ रहे हैं.

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By Prabhat Khabar News Desk

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