आइआइटी खड़गपुर व राइन-मेन यूनिवर्सिटीज के बीच समझौता

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) खड़गपुर ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शिक्षा के क्षेत्र में भारत-जर्मनी सहयोग को नयी दिशा देते हुए जर्मनी की राइन-मेन यूनिवर्सिटीज (आरएमयू) के साथ एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया है.

संयुक्त अनुसंधान, शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर

प्रतिनिधि, खड़गपुर.

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) खड़गपुर ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शिक्षा के क्षेत्र में भारत-जर्मनी सहयोग को नयी दिशा देते हुए जर्मनी की राइन-मेन यूनिवर्सिटीज (आरएमयू) के साथ एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया है. यह एमओयू टेक्निकल यूनिवर्सिटी डार्मश्टाट में आयोजित एक समारोह में संपन्न हुआ. आइआइटी खड़गपुर के निदेशक प्रोफेसर सुमन चक्रवर्ती के नेतृत्व में एक प्रतिष्ठित प्रतिनिधिमंडल इस अवसर पर उपस्थित था. समारोह में डॉ रामानुज बनर्जी, काउंसलर (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी), भारतीय दूतावास, बर्लिन; प्रोफेसर डॉ-इंग. मैथियास ऑएक्सनर, उपाध्यक्ष (अनुसंधान), टीयू डार्मश्टाट; डॉ जाना फ्राइहोफर, निदेशक (अंतरराष्ट्रीय मामलों); और डॉ योहानेस म्युलर, प्रमुख (ग्लोबल ऑफिस), गोएथे यूनिवर्सिटी फ्रैंकफर्ट भी उपस्थित थे.

आरएमयू जर्मनी के तीन प्रमुख विश्वविद्यालयों गोएथे यूनिवर्सिटी फ्रैंकफर्ट एम माइन, योहानेस गुटेनबर्ग यूनिवर्सिटी माइनज और टेक्निकल यूनिवर्सिटी डार्मश्टाट का एक रणनीतिक गठबंधन है. यह समझौता संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, शिक्षकों और छात्रों के आदान-प्रदान, शैक्षणिक नेटवर्किंग और सांस्कृतिक पहलों के लिए एक सशक्त ढांचा प्रदान करेगा. इसके साथ ही आइआइटी खड़गपुर को आरएमयू के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क आरएमयूनिवर्स में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है, जिससे संयुक्त अनुसंधान प्रस्तावों, फैलोशिप, व्याख्यान श्रृंखला और छात्र अनुसंधान प्रवासों में भागीदारी के नये अवसर खुलेंगे.

हस्ताक्षर समारोह के दौरान प्रोफेसर सुमन चक्रवर्ती ने कहा, “यह साझेदारी भारत-जर्मनी वैज्ञानिक सहयोग के एक नये अध्याय की शुरुआत है. आइआइटी खड़गपुर के नवाचार-प्रेरित पारिस्थितिकी तंत्र और राइन-मेन यूनिवर्सिटीज की गहन शैक्षणिक एवं अनुसंधान क्षमता का संगम है. हम मिलकर ऐसे भविष्य-तैयार शोधकर्ताओं और नवप्रवर्तकों को तैयार करने की आकांक्षा रखते हैं, जो वैश्विक चुनौतियों का समाधान कर सकें.”

यह सहयोग संयुक्त परियोजनाओं, पीएचडी प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और प्रारंभिक करियर शोधकर्ताओं की गतिशीलता को प्रोत्साहित करेगा. एमओयू पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगा और भारत-जर्मनी के बीच निरंतर शैक्षणिक आदान-प्रदान एवं नवाचार-आधारित सहयोग को सुदृढ़ करेगा.

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Published by: Akhilesh kumar singh

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