खास बातें
Marco Rubio Kolkata Comment: अमेरिका के नवनियुक्त विदेश मंत्री मार्को रूबियो के एक पुराने संदर्भ को लेकर कोलकाता में नयी बहस छिड़ गयी है. रूबियो ने अपने एक बयान में कोलकाता को ‘मदर टेरेसा का शहर’ कहकर संबोधित किया था. इस पर अब बंगाल के बौद्धिक और राजनीतिक हलकों से तीखी प्रतिक्रिया आ रही है.
मिशनरीज ऑफ चैरिटी बंगाल की पहचान नहीं
जानकारों के साथ-साथ स्थानीय लोगों का कहना है कि रूबियो को अपनी जानकारी अपडेट करने की जरूरत है. पश्चिम बंगाल में हुए हालिया सत्ता और वैचारिक परिवर्तन के बाद अब कोलकाता अपनी प्राचीन आध्यात्मिक जड़ों की ओर लौट आया है. अब यह शहर मिशनरीज ऑफ चैरिटी की बजाय अपनी संरक्षक देवी ‘मां काली’ के शहर के रूप में अपनी वैश्विक पहचान को फिर से स्थापित कर रहा है.
मार्को रूबियो का वो बयान, जिस पर मचा बवाल
अमेरिकी राजनीति के कद्दावर नेता मार्को रूबियो ने भारत के साथ संबंधों और मानवता की सेवा का जिक्र करते हुए कोलकाता को मदर टेरेसा की विरासत से जोड़ा था. हालांकि, यह संबोधन पश्चिमी देशों में दशकों से प्रचलित रहा है, लेकिन आज के बदलते बंगाल में इसे ‘औपनिवेशिक मानसिकता’ और ‘एकतरफा पहचान’ के रूप में देखा जा रहा है.
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पहचान का संकट और सांस्कृतिक पुनर्जागरण
कोलकाता के लोगों का तर्क है कि मदर टेरेसा का काम महान था, लेकिन इस शहर का इतिहास और आत्मा हजारों साल पुरानी शक्ति उपासना और मां काली से जुड़ी है. राज्य में नयी सरकार के गठन और दक्षिणेश्वर से लेकर कालीघाट तक के जीर्णोद्धार ने इस नैरेटिव को और मजबूत किया है कि कोलकाता की असली पहचान उसकी अपनी संस्कृति है.
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मदर टेरेसा बनाम मां काली : नैरेटिव में बड़ा बदलाव
पिछले कुछ वर्षों में कोलकाता की सार्वजनिक छवि में एक बड़ा बदलाव आया है. दक्षिणेश्वर और कालीघाट मंदिर अब केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि बंगाल की अस्मिता के प्रतीक बन गये हैं. पर्यटन विभाग और सांस्कृतिक संस्थाएं अब कोलकाता को ‘काली क्षेत्र’ के रूप में प्रचारित कर रही हैं.
पश्चिमी चश्मे का स्थानीय लोगों ने शुरू किया विरोध
स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि पश्चिम हमेशा भारत को गरीबी और सेवा (जिसका प्रतिनिधित्व मदर टेरेसा करती थीं) के नजरिये से देखना चाहता है, जबकि मां काली शक्ति, न्याय और संहार की प्रतीक हैं, जो उभरते भारत की नयी सोच को दर्शाता है.
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Marco Rubio Kolkata Comment: अमेरिकी विदेश मंत्रालय को ‘फैक्ट चेक’ की सलाह
सोशल मीडिया पर भी यह चर्चा जोरों पर है कि जब मार्को रूबियो जैसा बड़ा नेता अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बात करता है, तो उसे संबंधित स्थान की वर्तमान भावनाओं का सम्मान करना चाहिए. 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद बंगाल की राजनीतिक दिशा बदलने के साथ-साथ सांस्कृतिक प्राथमिकताओं में भी बड़ा फेरबदल हुआ है. जानकारों कहते हैं कि जिस शहर का नाम ही कालीकाटा (मां काली के नाम पर) से निकला हो, उसे किसी विदेशी मिशनरी के नाम से पहचानना उसके मूल इतिहास के साथ अन्याय है.
शक्ति की भूमि पर नयी राजनीति
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने भी शक्ति उपासना और स्थानीय सांस्कृतिक प्रतीकों को बढ़ावा देने की बात कही है. ऐसे में रूबियो का बयान उन लोगों को रास नहीं आ रहा है, जो बंगाल को ‘क्रांतिकारियों और शक्ति’ की धरती मानते हैं. कोलकाता अब यह संदेश दे रहा है कि यह City of Joy के साथ-साथ City of Shakti भी है.
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