राज्य में अस्थिरता पैदा करने के लिए धरना दे रही हैं ममता बनर्जी : भाजपा

पश्चिम बंगाल में एसआइआर के बाद अंतिम मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों का नाम हटाये जाने के खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से शुक्रवार को कोलकाता में धरना शुरू करने पर राज्य में मुख्य विपक्षी भाजपा ने जोरदार हमला बोला है.

संवाददाता, कोलकाता

पश्चिम बंगाल में एसआइआर के बाद अंतिम मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों का नाम हटाये जाने के खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से शुक्रवार को कोलकाता में धरना शुरू करने पर राज्य में मुख्य विपक्षी भाजपा ने जोरदार हमला बोला है. भाजपा के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा के पूर्व सदस्य व पद्मभूषण से सम्मानित स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि ममता बनर्जी के धरना कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य चुनाव आयोग की एसआइआर प्रक्रिया को बाधित करना और राज्य में अस्थिरता पैदा करना है. प्रदेश भाजपा मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का संशोधन एक संवैधानिक कर्तव्य है, जिसका उद्देश्य फर्जी और अवैध नामों को हटाकर एक सटीक और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करना है. लेकिन इस प्रक्रिया को राजनीतिक उद्देश्यों से विफल करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के संवैधानिक कर्तव्यों के पालन में राज्य सरकार का सहयोग आवश्यक है, लेकिन वास्तव में यह करने की बजाय विभिन्न प्रकार से बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं.

ममता सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने राज्य की गिरती कानून व्यवस्था पर भी चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में पिछले 15 वर्षों के टीएमसी शासन में बंगाल में प्रशासनिक ढांचे का क्षरण और कानून-व्यवस्था की स्थिति का गिरना स्पष्ट रूप से सामने आया है. दासगुप्ता ने कहा कि वर्तमान में राज्य में कानून का शासन नहीं बल्कि शासक का कानून स्थापित हो गया है, जिसके कारण आम लोगों की सुरक्षा और न्याय का वातावरण गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है.

महिला सुरक्षा के मुद्दे पर भी उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार देश में होने वाली एसिड हमलों की ज्यादातर घटनाएं बंगाल में होती है.

साथ ही दोषियों के खिलाफ सजा की दर अत्यंत कम है, जो राज्य की न्यायिक व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है.

उन्होंने कहा कि अपराध में वृद्धि, राजनीतिक हिंसा और भ्रष्टाचार के प्रसार ने बंगाल के सामाजिक और आर्थिक वातावरण को गंभीर रूप से प्रभावित किया है. शिक्षक भर्ती सहित भ्रष्टाचार के कई मामलों के कारण राज्य की छवि को नुकसान पहुंचा है और उद्योग तथा निवेश का माहौल कमजोर हुआ है.

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By AKHILESH KUMAR SINGH

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