बंगाल में हार के बाद ममता बनर्जी को याद आया INDIA गठबंधन! दिल्ली में बड़ी बैठक की तैयारी, क्या कांग्रेस देगी साथ?

Mamata Banerjee INDIA Bloc Meeting: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में हार के बाद ममता बनर्जी ने INDIA ब्लॉक को पुनर्जीवित करने की कोशिश शुरू की है. क्या कांग्रेस, सपा और नाराज DMK इस बैठक में शामिल होंगे? जानें गठबंधन के भीतर मचे घमासान की पूरी इनसाइड स्टोरी.

Mamata Banerjee INDIA Bloc Meeting: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में मिली ऐतिहासिक शिकस्त के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी खोयी हुई सियासी जमीन तलाशने के लिए INDIA ब्लॉक का री-सेट बटन दबा दिया है. खबर है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ने विपक्षी गठबंधन की एक आपात बैठक बुलाने का आह्वान किया है.

भवानीपुर में खुद चुनाव हार गयीं ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल में 15 साल तक एकछत्र राज करने वाली ममता बनर्जी के लिए 2026 का चुनाव बड़ा झटका साबित हुआ. वह न केवल अपनी सत्ता गंवा बैठीं, बल्कि अपने ही गढ़ भवानीपुर में शुभेंदु अधिकारी से खुद भी चुनाव हार गयीं. अब सवाल है कि क्या दिल्ली की मदद से ममता बंगाल में वापसी कर पायेंगी? सवाल यह भी है कि क्या पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस ममता के साथ खड़ी होगी?

अंतिम फैसला AICC लेगा : आशुतोष चटर्जी

इस बारे में पूछे जाने पर पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस के महासचिव आशुतोष चटर्जी ने प्रभात खबर (prabhatkhabar.com) से कहा कि इस पर कोई भी अंतिम फैसला ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) लेगी. प्रदेश स्तर पर कोई भी फैसला हमारे प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार लेंगे. उनकी राय सभी को मान्य होगी. हालांकि, आशुतोष चटर्जी ने साथ ही यह भी जोड़ा कि कुछ भी करने से पहले ममता बनर्जी को कुछ सवालों के जवाब देने होंगे.

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ममता के शासन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मर्डर हुए, उन्हें झूठे केस में फंसाया गया : चटर्जी

बंगाल प्रदेश कांग्रेस के महासचिव ने कहा कि ममता बनर्जी को और उनकी पार्टी को शायद याद नहीं होगा, लेकिन कांग्रेस पार्टी को याद है कि टीएमसी के शासन में पंचायत चुनाव में सबसे पहले जिस व्यक्ति की हत्या हुई थी, वह कांग्रेस का कार्यकर्ता था. ममता बनर्जी को पंचायत चुनाव से लेकर अन्य चुनावों के दौरान हुई हिंसा में राजनीतिक कार्यकर्ताओं के मर्डर और कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को झूठे मुकदमों में फंसाने की साजिश का जवाब देना होगा.

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मर्डर और बंगाल की लूट का जवाब ममता को देना होगा : आशुतोष

चटर्जी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की चुनावी हार के बाद ममता बनर्जी की बयानबाजी अलग बात है. जमीनी हकीकत कुछ और है. विपक्षी एकता की बात करना बिल्कुल सही है, लेकिन राजनीतिक कार्यकर्ताओं के मर्डर और बंगाल की लूट का जवाब ममता बनर्जी को देना होगा.

हार का वो जख्म, जिसने ‘दीदी’ को झुकने पर किया मजबूर

अप्रैल 2026 में हुए पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजे टीएमसी के लिए किसी बुरे सपने जैसे रहे. 2021 में 215 सीटें जीतने वाली टीएमसी 2026 में महज 80 सीटों पर सिमट गयी. सालों तक बीजेपी की ‘भगवा लहर’ को रोकने वाली ममता बनर्जी को उन्हीं के पुराने सहयोगी रहे शुभेंदु अधिकारी ने इस बार धूल चटा दी. जानकारों का मानना है कि राज्य में कमजोर पड़ने के बाद अब ममता बनर्जी कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के साथ रिश्तों को सुधारकर खुद को राष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक बनाये रखना चाहती हैं.

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गठबंधन में कन्फ्यूजन : कांग्रेस और सपा को जानकारी ही नहीं?

ममता बनर्जी ने बैठक की अपील तो कर दी, लेकिन गठबंधन के अन्य साथियों के बीच तालमेल की भारी कमी दिख रही है. इस बैठक के बारे में कांग्रेस के मीडिया विभाग से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा- मुझे कोई जानकारी नहीं है.

समाजवादी पार्टी की स्थिति और राहुल का सॉफ्ट रुख

अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने भी फिलहाल इस पर अनभिज्ञता जतायी है. पार्टी सूत्रों का कहना है कि अगर ममता बनर्जी सीधे अखिलेश यादव से बात करती हैं, तभी जून में बैठक संभव है. उधर, चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने ममता बनर्जी पर तीखे हमले किये थे, लेकिन हार के बाद उन्होंने ममता को दिलासा देते हुए इसे बीजेपी और चुनाव आयोग की ‘वोट चोरी’ करार दिया था.

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तमिलनाडु का ‘पंगा’ और गठबंधन में नयी दरार

INDIA गठबंधन की राह में केवल ममता की हार ही चुनौती नहीं है, बल्कि दक्षिण से आयी एक खबर ने इसे और पेचीदा बना दिया है. तमिलनाडु में विजय की पार्टी TVK को सरकार बनाने के लिए कांग्रेस ने समर्थन दिया. इससे स्टालिन की DMK नाराज है. DMK ने अब संसद (लोकसभा और राज्यसभा) में कांग्रेस से अलग बैठने की व्यवस्था की मांग कर दी है. ऐसे में क्या DMK गठबंधन का हिस्सा बनी रहेगी, यह बड़ा सवाल है. संभावना जतायी जा रही है कि विजय की पार्टी TVK भी इस गठबंधन में शामिल हो सकती है.

Mamata Banerjee INDIA Bloc Meeting: डर ही है गठबंधन का ‘गोंद’

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विपक्षी दलों के बीच आपसी मतभेद कितने भी हों, लेकिन बीजेपी का डर ही उन्हें एक साथ रहने पर मजबूर करता है. ममता बनर्जी भी इसी रणनीति पर काम कर रही हैं. वे जानती हैं कि संसद में विपक्षी एकता बनाये रखने और अपनी खोयी ताकत पाने के लिए कांग्रेस का साथ जरूरी है.

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Published by: Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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