Mamata Banerjee on Election Commission: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने राज्य में बड़े पैमाने पर हुए प्रशासनिक फेरबदल के बाद निर्वाचन आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया को चिट्ठी लिखकर भी अपनी नाराजगी का इजहार किया है. इससे पहले, गुरुवार (19 मार्च 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर ममता बनर्जी ने दावा किया कि चुनाव की औपचारिक अधिसूचना से पहले ही 50 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों को मनमाने ढंग से हटाना प्रशासनिक फेरबदल नहीं, संस्थानों का ‘व्यवस्थित राजनीतिकरण’ है.
ममता बनर्जी की चिट्ठी की खास बातें
- मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, गृह सचिव जेपी मीणा और डीजीपी पीयूष पांडे सहित 50 से अधिक अधिकारियों को हटा दिया गया.
- दुष्यंत नरियाला को मुख्य सचिव और संघमित्रा घोष को गृह सचिव की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग ने दी.
- इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया निष्पक्षता और जनता के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे.
बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है- ममता बनर्जी
ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सुप्रीमो और प्रदेश की मुख्यमंत्री ने आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरह से बंगाल को निशाना बनाया गया है, वह अप्रत्याशित और चिंताजनक है. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर जैसे शीर्ष पदों से अधिकारियों को हटाना किसी प्रशासनिक सुधार का हिस्सा नहीं, बल्कि ‘उच्चतम स्तर का राजनीतिक हस्तक्षेप’ है.
ममता बनर्जी का मुख्य चुनाव आयुक्त को कड़ा पत्र
बृहस्पतिवार की शाम को ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को एक कड़ा पत्र लिखा. इस पत्र को उन्होंने ‘एक्स’ पर शेयर किया. पत्र में कहा है कि बिना किसी परामर्श या दुर्व्यवहार के आरोप के 50 से अधिक अधिकारियों को हटाना प्रशासन को बाधित करता है. बिना कारण अधिकारियों का स्थानांतरण आयोग की तटस्थता पर प्रश्नचिह्न लगाता है. यह भी कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद पूरक मतदाता सूची (Supplementary Rolls) का प्रकाशन अभी तक नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि ऐसी एकतरफा कार्रवाइयां सहकारी संघवाद (Co-operative Federalism) और लोकतांत्रिक सिद्धांतों को कमजोर करती हैं और अनिश्चितता गहरी होती है. नागरिकों के अधिकारों में बाधा आती है .
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ममता बनर्जी ने क्या-क्या कहा?
- आईबी (IB), एसटीएफ (STF) और सीआईडी (CID) जैसी महत्वपूर्ण एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों को चुन-चुनकर बंगाल से बाहर भेजा जा रहा है.
- जिन अधिकारियों को राज्य के पदों से हटाया गया, उन्हें ही दूसरे राज्यों में चुनाव पर्यवेक्षक बनाया जा रहा है. यह ‘घोर अक्षमता’ और ‘अराजकता’ का मामला है.
- ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने इसे पश्चिम बंगाल पर ‘जबरदस्ती कब्जा’ करने की जान-बूझकर रची गयी साजिश बताया.
धमकियों के आगे नहीं झुकेगा बंगाल – ममता बनर्जी
अपने कड़े संदेश में ममता बनर्जी ने कहा कि यह स्थिति लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने वाली है. उन्होंने कहा- मैं बंगाल सरकार के हर अधिकारी और उनके परिवारों के साथ एकजुटता से खड़ी हूं. बंगाल ने कभी धमकियों के आगे घुटने नहीं टेके हैं और न ही कभी झुकेगा. ममता बनर्जी ने अपने फेसबुक पोस्ट में ट्रांसफर-पोस्टिंग की लिस्ट से लेकर हाल में जारी चुनाव आयोग के कई आदेश की कॉपी तक शेयर की है.
चुनाव आयोग पर ममता के 3 प्रहार
- अधिकारियों के तबादले लोकतंत्र पर प्रहार, बंगाल में अघोषित आपातकाल
- पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग की कार्रवाई असंवैधानिक
- बिना पूर्व सूचना के 50 से अधिक अफसरों को बिना ठोस आधार के हटाया गया
यह शासन नहीं, बल्कि अधिकार के रूप में पेश की जा रही अराजकता है. जबरदस्ती और संस्थागत हेरफेर के जरिये बंगाल पर कब्जे की साजिश रची जा रही है.
ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल
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