Mahua Moitra vs Nadia Admin: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की फायरब्रांड सांसद महुआ मोईत्रा और पश्चिम बंगाल के नदिया जिला प्रशासन के बीच कृष्णनगर सर्किट हाउस से जुड़ा विवाद शीर्ष अदालत तक पहुंच गया है. 14 अगस्त की देर रात सर्किट हाउस से कथित तौर पर जबरन बेदखल करने के प्रयासों को महुआ मोईत्रा ने ‘संवैधानिक मर्यादा और संघीय ढांचे पर सीधा हमला’ करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) में अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल की. हालांकि, चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने इस मामले की तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया.
आधी रात के 3 बड़े घटनाक्रम और पूरे विवाद को समझें
संसद का मानसून सत्र खत्म होने के बाद सांसद महुआ मोईत्रा अपने संसदीय क्षेत्र कृष्णनगर के सर्किट हाउस पहुंची थीं. आरोप है कि रात 9:47 बजे अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (ADM) ने फोन कर उनसे तुरंत कमरा खाली करने को कहा. रात 10:52 बजे उन्हें व्हाट्सएप पर 12 अगस्त की तारीख का एक आदेश भेजा गया, जिसमें ‘रखरखाव और सफाई’ के नाम पर परिसर बंद करने की बात कही गयी थी.
बाहर भीड़ और जय श्री राम के नारे
महुआ मोईत्रा का दावा है कि जब उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट के संरक्षण आदेश और सांसद के अधिकार का हवाला देते हुए कमरा खाली करने से मना किया, तब सर्किट हाउस के बाहर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गये और नारेबाजी करने लगे. तृणमूल कांग्रेस की सांसद ने आरोप लगाया कि डीएम और एसपी आवास के ठीक सामने इस तरह भीड़ का जुटना प्रशासनिक मिलीभगत की ओर इशारा करता है.
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लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र
ममता बनर्जी गुट की फायरब्रांड सांसद महुआ मोईत्रा ने लोकसभा सचिवालय (Lok Sabha Secretariat) में अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर विशेषाधिकार हनन की शिकायत की. उन्होंने नदिया के डीएम, एडीएम और डिप्टी कलेक्टर के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव का नोटिस दिया है.
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अदालत में क्या हुआ?
महुआ मोईत्रा के वकील ने मुख्य न्यायाधीश के समक्ष दलील दी कि एक महिला सांसद को आधी रात को सरकारी आवास से बाहर करना गंभीर संवैधानिक उल्लंघन है और इसके लिए स्वतंत्र जांच की जरूरत है. हालांकि, शीर्ष अदालत की पीठ ने याचिका पर कोई तत्काल आदेश देने की बजाय नियम के अनुसार विचार करने की बात कही.
