माओवादियों के ‘लाल’ आतंक को हराकर ‘लोकतंत्र’ के नायक बने खुदीराम टुडू, पढ़ें रानीबांध के शिक्षक की पूरी कहानी

Kshudiram Tudu Ranibandh MLA: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में रानीबांध सीट से भाजपा के खुदीराम टुडू ने बड़ी जीत हासिल की है. माओवादी दौर के संघर्ष से लेकर विधायक बनने तक, जानें खुदीराम टुडू के जीवन की प्रेरणादायक कहानी.

Kshudiram Tudu Ranibandh MLA: पश्चिम बंगाल की राजनीति में कुछ जीतें केवल सीटों का आंकड़ा नहीं, बल्कि संघर्ष की दास्तान होती हैं. बांकुड़ा जिले की रानीबांध (ST) सीट से भाजपा की ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाले खुदीराम टुडू की कहानी भी कुछ ऐसी ही है.

जान जोखिम में डालकर किया ‘आतंक’ का सामना

एक समय था, जब जंगलमहल का यह इलाका माओवादी आतंक के साये में सांस लेता था. उस दौर में खुदीराम टुडू ने न केवल अपनी जान जोखिम में डालकर आतंक का सामना किया, बल्कि शिक्षा की लौ भी जलाये रखी. आज वही साधारण शिक्षक ‘माननीय विधायक’ बनकर बंगाल विधानसभा पहुंच गये हैं.

लाल आतंक का वो दौर और खुदीराम का हौसला

जंगलमहल के रानीबांध में वर्ष 2008 से 2011 के बीच माओवादियों का दबदबा ही नहीं, आतंक था. पेशे से शिक्षक खुदीराम टुडू ने उस दौर को करीब से देखा है, जब माओवादियों के डर से लोग घरों से बाहर निकलने में भी कतराते थे. उन पर भी कई बार दबाव बनाया गया, लेकिन उन्होंने कभी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया. खुदीराम ने अपने कई साथियों को खोया, लेकिन आदिवासियों के अधिकारों के लिए उनकी लड़ाई कभी थमी नहीं.

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शिक्षक से विधायक तक का सफर

खुदीराम टुडू की छवि एक सौम्य और मिलनसार शिक्षक की रही है. वे सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में शिक्षक हैं और उनकी पत्नी आशा वर्कर. इस सादगी ने उन्हें जनता के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया. 2026 के बंगाल चुनाव में उन्होंने टीएमसी की कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री ज्योत्सना मांडी को पटखनी दी है. रानीबांध की जनता ने विकास और सुरक्षा के नाम पर खुदीराम को अपना प्रतिनिधि चुना है. खुदीराम कहते हैं कि उनकी प्राथमिकता रानीबांध के दुर्गम इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना है.

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Kshudiram Tudu Ranibandh MLA: जंगलमहल का बदलता मिजाज

शुभेंदु अधिकारी की नयी सरकार में खुदीराम टुडू जैसे जमीनी नेताओं का कद बढ़ा है. माओवाद प्रभावित इलाकों में भाजपा की इस जीत को ‘आतंक पर लोकतंत्र की विजय’ के रूप में देखा जा रहा है. खुदीराम का मानना है कि अब जंगलमहल में डर का नहीं, बल्कि ‘सोनार बांग्ला’ के निर्माण का युग शुरू हो गया है.

हिंसा के रास्ते पर चल पड़े युवाओं के लिए मिसाल हैं टुडू

साधारण झोपड़ी से निकलकर सत्ता के गलियारों तक पहुंचने वाले खुदीराम टुडू आज उन हजारों युवाओं के लिए मिसाल हैं, जो हिंसा के रास्ते को छोड़कर विकास की मुख्यधारा से जुड़ना चाहते हैं.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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