कोलकाता : तारापीठ होटल में लगी आग में मरने वालों की संख्या अभी पूरी तरह से सुलझी भी नहीं थी कि बुधवार आधी रात को कोलकाता के मिर्जा ग़ालिब स्ट्रीट स्थित होटल में आग लग गई. शुरुआती तौर पर माना जा रहा है कि आग एसी में शॉर्ट सर्किट के कारण लगी है. हादसे के बाद मौके पर पहुंचे अग्निशमन राज्य मंत्री कौशिक चौधरी होटल की संरचना देखकर हैरान रह गये. उन्होंने खुद मीडिया से कहा-कहा- ऐसे होटल को लाइसेंस कैसे मिल गया.
कैसी है होटल की संरचना
न्यू मार्केट के मिर्ज़ा ग़ालिब स्ट्रीट पर स्थित होटल का इंट्री प्वाइंट लगभग पांच फुट ऊंचा है. फोल्डिंग गेट के लिए दोनों तरफ़ थोड़ी ज़्यादा जगह है. यह इमारत का मुख्य प्रवेश द्वार है. लोहे के फोल्डिंग गेट के चारों ओर बोर्ड लटके हुए हैं. उन पर हर होटल का नाम लिखा है. कुल मिलाकर छह होटल. यानी, उस साफ़-सुथरी पुरानी इमारत की हर मंज़िल पर होटल हैं.
सीढ़ियों के लिए भी जगह नहीं
अग्निशमन राज्य मंत्री कौशिक चौधरी कहते हैं- सतर्क किए जाने के बावजूद कई लोग बाहर नहीं निकल पाए. अधिकतर मौतें दम घुटने से हुई है. उन्होंने कहा- इस इमारत के अंदर अगर आप जायेंगे तो हैरान रह जाएंगे. कमरों के अंदर कमरे, कमरों के अंदर कमरे.. यह एक पूरा भूल-भुलैया है. अंदर घुसते ही खो जाने जैसा लगता है. पांच मंज़िला इमारत की सीढ़ियां संकरी लोहे की हैं. वहां सीढ़ियों के लिए जगह ही नहीं है. सामने सिर्फ़ डेढ़ फुट का रास्ता है.
ऐसे होटलों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
मंत्री ने कहा- वहां दो लोग साथ-साथ नहीं चल सकते. वहां कोई बाहरी सीढ़ी नहीं है जिससे खतरे की स्थिति में लोगों को बचाया जा सके. होटल में कोई फायर एग्जिट नहीं था. आप इसे देखकर हैरान रह जाएंगे. राज्य के अग्निशमन एवं बचाव मंत्री कौशिक चौधरी सवाल उठा रहे हैं- क्या ऐसे होटलों को व्यापार लाइसेंस मिला हुआ था. उन्होंने कहा कि ऐसे होटलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने मुख्यमंत्री से भी इस बारे में बात की.
अग्निशमन विभाग के बगल में ही है होटल
अग्निशमन राज्य मंत्री कौशिक चौधरी का कार्यालय भी मिर्जा ग़ालिब स्ट्रीट पर ही है. यह इमारत उसके बगल में है. यहां हर मंजिल पर छोटे-छोटे होटल हैं. न्यू मार्केट जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में, इनमें से ज़्यादातर इमारतें कई साल पुरानी हैं. यहां एक के बाद एक होटल खुलते चले आए हैं. सुरक्षा के नाम पर कोई निगरानी नहीं है. यह इमारत भी बहुत पुरानी है, लेकिन इन्हें व्यापार का लाइसेंस कैसे मिला?
पिछले हादसों से नहीं ली सबक
पिछली सरकार के कार्यकाल में, जोरासांको होटल में आग लगने के तीन दिनों के भीतर ही लेखापरीक्षा समिति का गठन किया गया था. इस समिति ने कोलकाता नगर पालिका में चार बैठकें कीं. समिति ने फैसला किया कि कोलकाता में रातोंरात खुले सभी होटलों का निरीक्षण किया जाएगा, ताकि यह देखा जा सके कि सभी नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं. लेकिन यह काम आज तक नहीं हो पाया.
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अब तक नहीं हो पाया सेफ्टी ऑडिट
नगर पालिका सूत्रों के अनुसार, निरीक्षण के लिए अग्निशमन विभाग के पास आवश्यक कर्मचारी नहीं हैं. कर्मचारियों की कमी के कारण, उन्हें बाहरी एजेंसियों की मदद लेनी पड़ेगी. पता चला कि कोलकाता नगर पालिका में ऐसे 3,788 होटल हैं. कर्मचारियों की कमी के कारण केवल 15-20 होटलों का ही निरीक्षण हो पाया. लेखापरीक्षा रिपोर्ट नगर पालिका और अग्निशमन विभाग को नहीं सौंपी गई.
मैंने एक तृतीय-पक्ष ऑडिट टीम बनाने की बात की थी क्योंकि अग्निशमन विभाग के पास पर्याप्त लोग नहीं थे. नगरपालिका निगरानी नहीं करती. निगरानी अग्निशमन विभाग की जिम्मेदारी है. मैं कैसे पता लगा सकता हूं कि व्यापार लाइसेंस प्राप्त किया गया था या नहीं.
- फिरहाद हकीम, पूर्व मेयर
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