Kolkata Fire: होटल, अस्पताल और कारखाने... 2010 से 2026 तक आग के 8 बड़े हादसे, 100 से ज्यादा मौतें

पश्चिम बंगाल में आगजनी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. 2010 से 2026 के बीच 8 बड़ी आग की घटनाओं में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. यह लेख इन हादसों के पैटर्न और कारणों पर प्रकाश डालता है.

कोलकाता : तारापीठ के मिर्ज़ा ग़ालिब स्ट्रीट स्थित एक होटल में लगी आग में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है. बुधवार को एक और होटल में आग लगी है. 9 लोगों की मौत हो गई है. कभी कारखानों में, कभी अस्पतालों में, कभी होटलों में, कभी बड़े रिहायशी इलाकों में. बंगाल में आगजनी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही है. पिछले दस वर्षों में पश्चिम बंगाल में हुई आठ बड़ी आगजनी की घटनाओं में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

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  1. कोलकाता, 24 मार्च 2010 : पार्क स्ट्रीट पर स्टीफन कोर्ट अपार्टमेंट्स मेंइस आग में 43 लोगों की मौत हो गई. कई शवों की पहचान नहीं हो सकी, क्योंकि आशंका थी कि वहां अन्य राज्यों से आए कई प्रवासी मजदूर काम करते थे. स्टीफंस कोर्ट में जल रही इमारत की ऊपरी मंजिलों पर फंसे अधिकांश पीड़ित आग में जलकर राख हो गए और शव इतने बुरी तरह जल गए थे कि उनकी पहचान करना असंभव था. दमकल गाड़ियों को घटनास्थल तक पहुंचने में काफी समय लगा.
  2. कोलकाता, 9 दिसंबर 2010 : कोलकाता के ढाकुरिया में स्थित एएमआरआई अस्पताल सात मंजिला इमारत के तहखाने में लगी आग में 93 लोगों की मौत हो गई. इमारत में जहरीला धुआं भर जाने के कारण ऊपरी मंजिलों पर दम घुटने से अधिकांश पीड़ितों की मौत हो गई.
  3. सूर्य सेन बाजार में आग (20003) : 27 फरवरी, 2013 को सियालदह के पास सूर्य सेन बाजार में एक बहुमंजिला इमारत में आग लग गई, जिसमें लगभग 19 श्रमिकों की मौत हो गई.
  4. स्ट्रैंड रोड कोल घाट रेलवे कार्यालय में आग (8 मार्च, 2021) : मध्य कोलकाता के स्ट्रैंड रोड स्थित न्यू कोयलाघाट बिल्डिंग (पूर्वी रेलवे का मुख्यालय) की 14वीं मंजिल पर भीषण आग लगी. इस हादसे में 9 लोंगों की मौत हुई थी.
  5. बड़ा बाजार के 'ऋतुराज होटल' में लगी आग (29 अप्रैल, 2025) : कोलकाता के भीड़-भाड़ वाले बाराबाजार या मेचुआ फल पट्टी इलाके में स्थित 'होटल ऋतुराज' (मदन मोहन बरमन स्ट्रीट) में आग लग गई. मृतकों की संख्या 14 (दो बच्चों सहित) थी. रात करीब 8:15 बजे इस छह मंजिला बजट होटल की पहली मंजिल पर आग लग गई. मरने वालों में ज्यादातर अन्य राज्यों के व्यापारी थे, जिनकी कमरों या सीढ़ियों में फंसे धुएं के कारण दम घुटने से मौत हो गई.
  6. 24 जून, 2025 : केश्टापुर के रबींद्रपल्ली क्षेत्र में तड़के सुबह एक घर में आग लग गई. घर के अंदर झुलसने से एक व्यक्ति की मौत हो गई.
  7. आनंदपुर गोदाम और मोमो फैक्ट्री में आग (26 जनवरी, 2026) : पूर्वी कोलकाता के आनंदपुर जिले के नाज़िराबाद इलाके में तड़के करीब 2:30 बजे मोमो के गोदाम और एक डेकोरेटर के गोदाम में आग लग गई. कई मजदूर अंदर फंस गए और झुलसने से उनकी मौत हो गई. बाद में डीएनए परीक्षण की मदद से उनके शवों की पहचान की गई.
  8. तिलजाला चमड़ा कारखाने में आग(12 मई, 2026) : दक्षिण कोलकाता के तिलजाला इलाके में एक बहुमंजिला मिश्रित उपयोग (व्यावसायिक और आवासीय) इमारत में आग लग गई. इस हादसे में 2 मजदूरों की मौत हो गयी. बाकी तीन गंभीर रूप से घायल हो गए.

इन घटनाओं में दिखता है एक पैटर्न

आपकी सूची में स्टीफंस कोर्ट (2010), AMRI अस्पताल (2010), सूर्य सेन बाजार (2013), न्यू कोयलाघाट बिल्डिंग (2021), ऋतुराज होटल (2025), आनंदपुर गोदाम (2026) और तिलजला की घटना (2026) अलग-अलग स्थानों और वर्षों की घटनाएं हैं, लेकिन उनमें कई समान तत्व दिखाई देते हैं:

  • घनी आबादी
  • नियमों का उल्लंघन/अपर्याप्त सुरक्षा
  • ज्वलनशील सामग्री
  • निकासी की खराब व्यवस्था
  • दमकल पहुंचने में कठिनाई

शॉर्ट सर्किट ही एक मात्र वजह नहीं

इसलिए इसे केवल 'शॉर्ट सर्किट से लगी आग' कहकर समाप्त करना समस्या को बहुत सरल बना देता है. शॉर्ट सर्किट आग की शुरुआत कर सकता है, लेकिन आग को सामूहिक त्रासदी में बदलने के पीछे भवन की संरचना, अग्नि-सुरक्षा व्यवस्था, निरीक्षण, लाइसेंसिंग और आपातकालीन निकासी जैसे अनेक कारक होते हैं.

ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों होती हैं?

  1. अग्नि-सुरक्षा नियमों का कमजोर अनुपालन कई पुराने या अवैध ढंग से संचालित प्रतिष्ठानों में फायर एग्जिट, स्प्रिंकलर, अलार्म, अग्निशामक यंत्र और आपातकालीन निकासी मार्ग पर्याप्त नहीं होते.
  2. पुरानी और अत्यधिक घनी इमारतें कोलकाता के पुराने व्यावसायिक इलाकों-जैसे बड़ाबाजार, मेचुआ और तिलजला-में संकरी गलियां, मिश्रित उपयोग वाली इमारतें और अनियोजित निर्माण दमकल की पहुंच और लोगों की निकासी दोनों को कठिन बनाते हैं.
  3. रिहायशी और व्यावसायिक गतिविधियों का खतरनाक मिश्रण घरों में छोटे कारखाने, गोदाम या वर्कशॉप चलना, तथा होटल/बाजार की इमारतों में ज्वलनशील सामान का भंडारण, आग को तेजी से फैलने वाला बना देता है.
  4. अवैध या बिना पर्याप्त अनुमति के कारोबार यदि किसी इमारत में कारखाना, गोदाम या होटल सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं चल रहा है, तो केवल आग लगने के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है. नियमित निरीक्षण और लाइसेंसिंग जरूरी है.
  5. गैस सिलेंडर और ज्वलनशील सामग्री गोदामों और खाद्य प्रतिष्ठानों में LPG सिलेंडर, प्लास्टिक, चमड़ा, कपड़ा, लकड़ी अथवा अन्य ज्वलनशील सामग्री आग को विस्फोटक रूप दे सकती है.
  6. धुआं आग से भी ज्यादा घातक बन जाता है AMRI अस्पताल, ऋतुराज होटल और अन्य घटनाओं में मौतों का बड़ा कारण केवल जलना नहीं, बल्कि जहरीले धुएं से दम घुटना था. बंद कमरे, संकरी सीढ़ियां और एक ही निकासी मार्ग इस खतरे को कई गुना बढ़ाते हैं.
  7. दमकल और बचाव दल के लिए पहुंच की समस्या घनी आबादी, संकरी सड़कें, अवैध पार्किंग और भीड़भाड़ के कारण दमकल वाहन घटनास्थल तक जल्दी नहीं पहुंच पाते. ऊंची इमारतों में लिफ्ट या बिजली पर निर्भर बचाव अभियान भी जोखिमपूर्ण हो सकता है-जैसा 2021 के न्यू कोयलाघाट हादसे में हुआ.

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लेखक के बारे में

By आशीष झा

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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