संवाददाता, कोलकाता.
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने शिक्षामित्रों का सेवाकाल 60 वर्ष तक बढ़ाने के अपने पिछले आदेश को बरकरार रखा है. हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा और न्यायमूर्ति अजय कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने राज्य की याचिका खारिज करते हुए फैसला सुनाया कि नियमित शिक्षकों की तरह शिक्षा मित्रों को भी 60 वर्ष की आयु तक काम करने का अधिकार है. खंडपीठ ने आगे निर्देश दिया कि शिक्षा मित्रों को राज्य के अंशकालिक शिक्षकों और सर्व शिक्षा मिशन परियोजना के तहत काम करने वालों के समान वेतन और अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएं. न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा और न्यायमूर्ति अजय कुमार गुप्ता की पीठ ने कहा कि राज्य शिक्षा विभाग शिक्षा मित्रों के प्रति शोषणकारी व्यवहार कर रहा है. दो दशकों से शिक्षामित्रों को कम वेतन पर सामान्य शिक्षकों की तरह काम करना पड़ रहा है, जोकि सामान्य शिक्षकों को दिये जाने वाले न्यूनतम वेतन से काफी कम है.
गौरतलब है कि राज्य में सर्व शिक्षा मिशन परियोजना के तहत 2004 में शिक्षा मित्रों की नियुक्ति की गयी थी. उनका मुख्य कार्य पिछड़े और स्कूल छोड़ चुके छात्रों को शिक्षा प्रदान करना था. इस काम के लिए उन्हें 2,400 रुपये वेतन मिलता था. 2013 में राज्य सरकार ने नये दिशानिर्देश जारी कर शिक्षा मित्रों की स्थिति बदल दी और उन्हें स्वयंसेवक घोषित कर दिया. राज्य शिक्षा विभाग ने शिक्षा मित्रों को 60 वर्ष की आयु तक नियमित शिक्षकों की तरह काम करने का अवसर या अंशकालिक शिक्षकों और शिक्षा मित्रों को मिलने वाली सुविधाएं बंद कर दी हैं. शिक्षा मित्रों के एक वर्ग ने राज्य के इस निर्णय के खिलाफ कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिस पर सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट ने यह फैसला सुनाया.
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