Jadavpur University के रजिस्ट्रार की छुट्टी, सलीम मंडल की जगह लेंगे देबजीत दत्ता

जादवपुर विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार के पद पर बड़ा बदलाव हुआ है. सलीम मंडल को हटाकर देबजीत दत्ता को नया रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया है. यह नियुक्ति विभिन्न विवादों के बीच हुई है.

Jadavpur University: कोलकाता : पोस्टरों, नारों, दीवार पर लिखे संदेशों आदि को लेकर चल रहे विभिन्न विवादों के बीच जादवपुर विश्वविद्यालय में एक बड़ा बदलाव हुआ है. विवादों के बीच रजिस्ट्रार को हटा दिया गया है. सलीम मंडल की जगह देबजीत दत्ता को विश्वविद्यालय का नया रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया है. इतिहास विभाग में प्रोफेसर सलीम मंडल को विभाग में वापस भेज दिया गया है. कला विभाग के सचिव इंद्रजीत दत्ता उनकी जगह नया कुलसचिव बनाया गया है.

'गेरुआ सम्मान यात्रा' के बीच हुआ बदलाव

इस बीच, बुधवार यानी आज मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की 'गेरुआ सम्मान यात्रा' गोलपार्क से जादवपुर तक है. इस माहौल में ऐसा बदलाव देखने को मिल रहा है. दरअसल, जादवपुर विश्वविद्यालय पिछले कुछ दिनों से उथल-पुथल की स्थिति में है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि वे यहां राष्ट्रवाद स्थापित करेंगे और चले जाएंगे. हाल ही में उन्होंने जादवपुर में 'वंदे मातरम' गीत गाने का कार्यक्रम भी आयोजित किया था.

राष्ट्रविरोधी नारे लिख रहे थे नक्सलवादी

कोलकाता नगर पालिका ने विश्वविद्यालय के अंदर लिखे राष्ट्रविरोधी नारों को फिर से हटवा दिया है. मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद नगर पालिका ने यह कार्रवाई की. छात्र संगठन एबीवीपी का दावा है कि नक्सलवादी लंबे समय से विश्वविद्यालय के विभिन्न स्थानों पर राष्ट्रविरोधी नारे लिख रहे थे. संगठन का आरोप है कि परिसर में कई जगहों पर इस तरह के नारे लिखे जाने के बावजूद लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं की गई. बाद में दीवारों पर नारे लिखे जाने लगे.

पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

भाजपा वाले रजिस्ट्रार सलीम मंडल का कर रहे थे विरोध

इतना ही नहीं, भाजपा समर्थक बार-बार यह मुद्दा उठा रहे थे कि रजिस्ट्रार सलीम मंडल अवैध हैं और उनका इस्तीफा आवश्यक है. फिर आज देखा गया कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा एक अधिसूचना जारी की गई. आचार्य की अनुमति से सलीम मंडल की जगह देबजीत दत्त को नियुक्त किया गया. प्रोफेसर नंदिनी चक्रवर्ती ने कहा- इस पर राय देने की कोई गुंजाइश नहीं है. हालांकि, इसे जिस तरह से हटाया गया है, वह कानूनी रूप से कितना सही है? यह सवाल अभी भी बना हुआ है.

Also Read: शुभेंदु अधिकारी ने ठुकराई विश्व हिंदू परिषद की मांग, बोले- दुर्गा पूजा में मांसाहार पर रोक नहीं

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By आशीष झा

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >