भारत बना रहा विश्व स्तरीय जहाज मरम्मत का नेटवर्क

भारत जल परिवहन को बढ़ावा देने और समुद्री क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए अपने अंतर्देशीय जहाज मरम्मत एवं रखरखाव के बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है

कोलकाता. केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर ने शुक्रवार को कहा कि भारत जल परिवहन को बढ़ावा देने और समुद्री क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए अपने अंतर्देशीय जहाज मरम्मत एवं रखरखाव के बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है.

‘इंडिया मैरीटाइम वीक 2025’ (27-31 अक्तूबर) से पहले श्री ठाकुर ने कहा कि देश के अंतर्देशीय जलमार्ग की देश के समुद्री क्षेत्र के लिए काफी अहम भूमिका में हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण से प्रेरित और केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के मार्गदर्शन में, ‘समुद्री अमृत काल विजन-2047’ के तहत सरकार के प्रयासों का उद्देश्य भारत के विशाल अंतर्देशीय जलमार्गों को ‘विकास के इंजन’ में बदलना है और इस क्षेत्र को उद्योग में वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना है. श्री ठाकुर ने कहा, ‘जहाजों की मरम्मत और रखरखाव की सुविधाएं अब केवल तकनीकी परिवर्तन नहीं हैं, बल्कि वे आर्थिक परिवर्तन के उत्प्रेरक हैं. हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत के अंतर्देशीय जलमार्ग विदेशी सेवाओं पर निर्भर हुए बिना पोत संचालन के लिए पूरी तरह सुसज्जित हों.’

हाल ही में पटना और वाराणसी में गंगा (राष्ट्रीय जलमार्ग-1) पर दो नयी जहाज मरम्मत सुविधाएं (एसआरएफ) चालू की गयी हैं, जबकि ब्रह्मपुत्र (राष्ट्रीय जलमार्ग-2) और बराक (राष्ट्रीय जलमार्ग-16) की जरूरतों को पूरा करने के लिए पांडु, गुवाहाटी में एक और सुविधा स्थापित की जा रही है. ठाकुर के अनुसार, इन सुविधाओं से न केवल जहाजों के लिए पूरी यात्रा तय करने का समय कम होगा, बल्कि रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे, तकनीकी कौशल को बढ़ावा मिलेगा और उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर क्षेत्र में एमएसएमई की भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा.

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By SUBODH KUMAR SINGH

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