कोलकाता. पश्चिम बंगाल सरकार के स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी स्थानांतरण दिशा-निर्देशों के खिलाफ तीन मेडिकल कॉलेजों के तीन चिकित्सकों अनिकेत महतो, देबाशीष हलदर और असफाकुल्ला नैया ने कलकत्ता हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. इस मामले में तीनों डॉक्टरों ने राज्य पर अस्पष्टता का आरोप लगाते हुए स्थानांतरण पर रोक लगाने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी. हालांकि, हाइकोर्ट ने फिलहाल उस मामले में किसी प्रकार का स्थगनादेश जारी करने से इनकार कर दिया. मामले की अगली सुनवाई तीन जुलाई को होगी. न्यायाधीश ने मामले की अगली सुनवाई के दिन राज्य सरकार को तीनों चिकित्सकों के स्थानांतरण और नियुक्ति से जुड़ी सारी जानकारी अदालत में जमा करने का आदेश दिया है. बुधवार को सुनवाई के दौरान राज्य के वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि इन डॉक्टरों को तीन साल के बांड पर सीनियर रेजिडेंट के तौर पर नियुक्त किया गया है.
यह सिविल सेवा का हिस्सा है और सिविल पद पर स्थानांतरण कोई अवैध मामला नहीं है. इसके बाद न्यायमूर्ति विश्वजीत बसु ने राज्य सरकार के महाधिवक्ता किशोर दत्ता से पूछा कि स्थायी रिक्तियों की अधिसूचना कहां है? इसके मद्देनजर महाधिवक्ता ने दस्तावेज पेश किया. उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार ने डॉक्टरों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में परिसेवा देने के लिए अनिवार्य सेवा की अधिसूचना जारी की थी. उसके बाद अदालत ने कहा कि राज्य को तीन जुलाई को स्थानांतरण से संबंधित अधिसूचना और नियुक्ति से जुड़ी सारी जानकारी अदालत में पेश करनी होगी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
