नौकरी गंवाने वाले ग्रुप सी व ग्रुप डी कर्मियों को राज्य सरकार करेगी आर्थिक मदद

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) के माध्यम से न���युक्त किये गये 25,752 लोगों की नौकरियां रद्द कर दी गयी हैं.

ग्रुप सी कर्मचारियों को 25 हजार व ग्रुप डी कर्मियों को मिलेगा 20 हजार रुपये मासिक भत्ता

संवाददाता, कोलकाता

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) के माध्यम से नियुक्त किये गये 25,752 लोगों की नौकरियां रद्द कर दी गयी हैं. हालांकि, इनमें योग्य शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 तक काम पर जाने की छूट दी है, लेकिन गैर-शिक्षण कर्मचारी यानी ग्रुप-सी व ग्रुप डी कर्मचारियों की नौकरियां रद्द कर दी हैं और उनको ब्याज सहित पूरा वेतन वापस करने का निर्देश दिया गया है. लेकिन इसी बीच, नौकरी गंवाने वाले ग्रुप सी व डी के कर्मचारियों ने शनिवार को राज्य सचिवालय के पास बने नबान्न सभागार में मुख्य सचिव मनोज पंत से मुलाकात की. बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य सचिव के फोन से बैठक को संबोधित किया. इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार गैर-शिक्षण कर्मचारियों के साथ खड़ी है, जिन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद अपनी नौकरी खो दी है. राज्य सरकार ने नौकरी गंवाने वाले ग्रुप सी और ग्रुप डी कर्मचारियों को मासिक भत्ता देने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से ग्रुप सी कर्मचारियों को 25 हजार व ग्रुप डी कर्मचारियों को 20 हजार रुपये मासिक भत्ता दिया जायेगा और यह मासिक तब तक दिया जायेगा जब तक मामला अदालत में सुलझ नहीं जाता. मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राज्य सरकार की ओर से अगले महीने यानी मई में सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका दायर की जायेगी. शिक्षकों के साथ-साथ गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए भी समीक्षा याचिकाएं दायर की जायेंगी. उन्होंने बताया कि राज्य शिक्षा विभाग इस मामले से जुड़ा हुआ है, इसलिए राज्य के श्रम विभाग की ओर से प्रति माह यह वित्तीय सहायता प्रदान की जायेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि बंद डनलप फैक्टरी के श्रमिकों को राज्य सरकार 10,000 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दे रही है. इसी तरह ग्रुप सी और ग्रुप डी के बेरोजगारों को भी आर्थिक सहायता की पेशकश की जा रही है. अगर वे सहमत होते हैं तो यह धनराशि दी जायेगी.

क्या कहा मुख्यमंत्री ने

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य सरकार के लिए अदालत के फैसले की अवहेलना करना संभव नहीं है. हालांकि, राज्य सरकार को इस बात की भी चिंता है कि उनका परिवार कैसे गुजर-बसर करेगा. इसलिए राज्य सरकार वैकल्पिक वेतन की व्यवस्था कर रही है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Akhilesh kumar singh

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >