शिक्षा विभाग का आरोप- जेयू के वीसी की नियुक्ति के लिए कोई नाम फाइनल नहीं कर रहे राज्यपाल

यह अच्छी तरह जानते हुए कि ऐसी कार्रवाई अत्यधिक अनियमित, अवैध, अनुशासनहीन और अवज्ञा के बराबर हैं.

कोलकाता. उच्च शिक्षा विभाग दो अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान इस बात को उठायेगा कि बंगाल के राज्यपाल ने जादवपुर विश्वविद्यालय में गतिरोध पैदा कर दिया है. उन्होंने एक अधिकृत कुलपति को उनकी सेवानिवृत्ति से चार दिन पहले हटा दिया है और न्यायालय द्वारा नियुक्त सर्च कमेटी द्वारा नामों का एक पैनल तैयार किये जाने के बावजूद पूर्णकालिक कुलपति की नियुक्ति नहीं की है. जेयू के अपदस्थ कुलपति भास्कर गुप्ता को भेजे गये एक पत्र में राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने लिखा है कि श्री गुप्ता ने 24 दिसंबर, 2024 को वार्षिक दीक्षांत समारोह आयोजित करके जादवपुर विश्वविद्यालय अधिनियम के ‘अनिवार्य प्रावधानों’ का जानबूझकर उल्लंघन किया. यह अच्छी तरह जानते हुए कि ऐसी कार्रवाई अत्यधिक अनियमित, अवैध, अनुशासनहीन और अवज्ञा के बराबर हैं. जेयू के रजिस्ट्रार को लिखे पत्र में कहा गया है, “आप जानते हैं कि अवैध रूप से आयोजित दीक्षांत समारोह के जरिये डिग्री प्रमाणपत्र जारी करना शुरू से ही अमान्य है और इससे छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ जायेगा. ऐसी परिस्थितियों में अवैध दीक्षांत समारोह के आयोजन के लिए आपके द्वारा अनधिकृत रूप से खर्च किये गये विश्वविद्यालय के फंड को वापस लेना अनिवार्य है,” जेयू रजिस्ट्रार को लिखे पत्र में कहा गया है. वहीं इस विषय में पूर्व वीसी ने कहा, “मुझे आरोपों में कोई तथ्य नहीं मिला. मुझे नहीं पता कि मुझे इस पर क्या टिप्पणी करनी चाहिए’ जादवपुर जैसे राज्य-सहायता प्राप्त विश्वविद्यालयों में पूर्णकालिक कुलपतियों की नियुक्ति के मामले की सुनवाई दो अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में होने की संभावना है. सर्च कमेटी द्वारा तैयार और मुख्यमंत्री द्वारा वरीयता क्रम में निर्धारित तीन नामों के पैनल वाली एक फाइल, नवंबर 2024 में राज्यपाल, राज्य-सहायता प्राप्त विश्वविद्यालयों के पदेन कुलाधिपति को भेजी गयी थी. उन्हें पैनल से एक नाम पर हस्ताक्षर करना था, लेकिन इसके बजाय, उन्होंने अधिकृत कुलपति को बर्खास्त कर दिया, जिससे संकट पैदा हो गया. जब बुधवार को मामले की सुनवाई होगी, तो इसका उल्लेख किया जायेगा. जेयू के अधिकारी ने कहा कि कुलाधिपति यानि कि चांसलर को अब तक पूर्णकालिक कुलपति नियुक्त कर देना चाहिए था, क्योंकि उन्हें पता था कि वर्तमान कुलपति 31 मार्च को सेवानिवृत्त होने वाले हैं. अधिकारी ने कहा कि भास्कर गुप्ता द्वारा हमें अपनी आसन्न सेवानिवृत्ति के बारे में सूचित करने के बाद, विभाग ने राजभवन को सूचना दी और कुलाधिपति कार्यालय को याद दिलाया कि अब समय आ गया है कि जेयू में पूर्णकालिक कुलपति की नियुक्ति की जाये. श्री गुप्ता का नाम मुख्यमंत्री द्वारा वरीयता क्रम में निर्धारित नामों के पैनल में सबसे ऊपर है, और कुलाधिपति को उस नाम पर हस्ताक्षर करना था, लेकिन ऐसा करने के बजाय, कुलाधिपति ने बिना कोई कारण बताये 27 मार्च को अधिकृत कुलपति को हटा दिया. पूर्णकालिक कुलपति 70 वर्ष तक पद पर रह सकते हैं. राजभवन के एक अधिकारी ने कहा कि जेयू में पूर्णकालिक कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है. उन्होंने कहा, “कुलाधिपति इस पर काम कर रहे हैं. हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि जेयू में पूर्णकालिक कुलपति की नियुक्ति कब की जायेगी.

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Published by: Ganesh mahto

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