रिटायर्ड कर्मी के बकाये का भुगतान करे राज्य सरकार

2007 में, उन्हें 2006 के एक सरकारी आदेश के अनुसार अस्थायी रूप से कंस्ट्रक्शन असिस्टेंट के तौर पर नियुक्त किया गया.

हाइकोर्ट के न्यायाधीश राजाबसु रायचौधरी ने सुनाया फैसला कोलकाता. दक्षिण दिनाजपुर जिला परिषद के सेवानिवृत कर्मचारी स्वपन कुमार ने बकाया पेंशन की मांग करते हुए कलकत्ता हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट के न्यायाधीश राजा बसु चौधरी ने राज्य सरकार को 12 सप्ताह के अंदर पेंशन और अन्य बकाया राशि का छह प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया. जानकारी के अनुसार, स्वपन कुमार को सबसे पहले 1999 में एक मेमो के आधार पर कॉन्ट्रैक्ट पर सब-असिस्टेंट इंजीनियर के तौर पर नियुक्त किया गया था. बाद में, 2007 में, उन्हें 2006 के एक सरकारी आदेश के अनुसार अस्थायी रूप से कंस्ट्रक्शन असिस्टेंट के तौर पर नियुक्त किया गया. 2010 में उनकी नौकरी स्थायी कर दी गयी थी. उसके बाद, उन्होंने लगातार 15 साल तक उस पद पर काम किया. वह इसी साल 29 फरवरी को सेवानिवृत हुए थे, लेकिन उन्हें अभी तक पेंशन नहीं मिली है. इस पर राज्य सरकार का तर्क है कि उन्हें 43 साल की उम्र में कंस्ट्रक्शन असिस्टेंट के तौर पर परमानेंट किया गया था. स्वपन कुमार उस पद पर परमानेंट नौकरी के लिए तय अधिकतम उम्र सीमा से ज़्यादा उम्र में परमानेंट हुए थे. इसलिए, उन्हें पेंशन नहीं दी जा सकती. स्वपन कुमार ने राज्य के फैसले को चुनौती देते हुए हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि उम्र सीमा के बहाने पेंशन रोकना गैर- कानूनी है. इसके बाद जस्टिस बसु चौधरी ने राज्य सरकार से याचिकाकर्ता को पेंशन सुविधाएं उपलब्ध कराने का आदेश दिया.

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Author: GANESH MAHTO

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