राज्य सरकार ने प्रकाशित की छठे वेतन आयोग की सिफारिश रिपोर्ट

राज्य सरकार के वित्त विभाग की ओर से आखिरकार छठे वेतन आयोग की सिफारिश की रिपोर्ट प्रकाशित कर दी गयी है.

हाइकोर्ट ने राज्य सरकार को रिपोर्ट प्रकाशित करने का दिया था निर्देश

कोलकाता. राज्य सरकार के वित्त विभाग की ओर से आखिरकार छठे वेतन आयोग की सिफारिश की रिपोर्ट प्रकाशित कर दी गयी है. वित्त विभाग की ओर से प्रकाशित छठे वेतन आयोग की सिफारिशों में डीए को लेकर भी बड़ी जानकारी दी गयी है. अर्थशास्त्री अभिरूप सरकार के नेतृत्व में गठित आयोग ने डीए पर बड़ा प्रस्ताव दिया है, इससे कर्मचारी निराश हैं.

क्या कहा गया सिफारिश में

सूत्रों के मुताबिक, उस रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि राज्य सरकार अपने फंड (वित्तीय संसाधनों) के हिसाब से समय-समय पर डीए के भुगतान के मुद्दे पर फैसला ले सकती है. साथ ही कहा गया है कि राज्य सरकार को अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के हिसाब से इस डीए को स्वीकृत करने, निर्धारित करने या बढ़ाने की जरूरत नहीं है. कई सरकारी कर्मचारी संगठन इस सिफारिश को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं. उनका कहना है कि इस सिफारिश में व्यावहारिक तौर पर यह कहा गया है कि केंद्रीय दर पर डीए देने की जरूरत नहीं है. ऐसा कैसे संभव हो सकता है? सरकारी कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस सिफारिश ने प्रभावी रूप से शिक्षकों और कर्मचारियों के लंबे समय से अर्जित अधिकारों को कम कर दिया है. एसयूए के महासचिव किंकर अधिकारी ने कहा कि राज्य के छठे वेतन आयोग की सिफारिशें बुधवार को प्रकाशित की गयी. इसमें कर्मचारियों के लंबे समय से अर्जित अधिकारों को कम करने की बात कही गयी है, जो हमें कतई स्वीकार नहीं है.

एआइसीपीआइ के अनुसार, डीए देने के मुद्दे को पूरी तरह से नकार दिया गया है. यह पूरी तरह से अवैध और असंवैधानिक है. इस सिफारिश के प्रकाशन से यह स्पष्ट हो गया है कि यह सरकार राज्य सरकार के कर्मचारियों सहित शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों के हितों के खिलाफ है.

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Published by: Subodh kumar singh

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