चुनाव आयोग पर लगाये थे EVM टैंपरिंग के आरोप, कोलकाता पुलिस ने ‘बांग्ला पक्खो’ के गार्गा चटर्जी को किया गिरफ्तार

Garga Chatterjee Arrested: कोलकाता पुलिस ने बांग्ला पक्खो के गार्गा चटर्जी को गिरफ्तार कर लिया है. उन पर बंगाल चुनाव 2026 के दौरान EVM टैंपरिंग और चुनाव आयोग के खिलाफ भ्रामक तथ्य फैलाने के आरोप हैं. जानें क्या है पूरी इनसाइड स्टोरी.

कोलकाता से विकास कुमार गुप्ता की रिपोर्ट

Garga Chatterjee Arrested: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य में जारी कानूनी कार्रवाई के बीच कोलकाता पुलिस ने एक बड़ी गिरफ्तारी की है. बांग्ला पक्खो (Bangla Pokkho) संगठन के प्रमुख गार्गा चटर्जी (Garga Chatterjee) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.

समाज में अशांति पैदा करने की कोशिश के लगे आरोप

गार्गा पर चुनाव आयोग के खिलाफ भ्रामक तथ्य फैलाने, ईवीएम (EVM) के साथ छेड़छाड़ के झूठे आरोप लगाने और समाज में अशांति पैदा करने की कोशिश करने के गंभीर आरोप हैं. कोलकाता के पुलिस कमिश्नर अजय नंद ने मंगलवार को गिरफ्तारी की पुष्टि की.

2 बार नोटिस के बाद भी नहीं हुए पेश

पुलिस के मुताबिक, गार्गा चटर्जी को इस मामले में पूछताछ के लिए 2 बार नोटिस भेजा गया था. वे एक बार भी पुलिस के सामने पेश नहीं हुए. जांच में सहयोग न करने के बाद पुलिस ने आखिरकार उन्हें 12 मई को धर दबोचा. उन्हें बुधवार को कोलकाता के बैंकशाल कोर्ट में पेश किया जायेगा.

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क्या थे गंभीर आरोप? क्यों हुई गिरफ्तारी?

गार्गा चटर्जी पर साइबर सेल ने स्वत: संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए मामला दर्ज किया था. उन पर निम्न आरोप लगे हैं.

  • EVM टैंपरिंग का दावा : उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दावा किया था कि चुनाव आयोग के नेतृत्व में ईवीएम के साथ धांधली की गयी थी.
  • काउंटिंग सेंटर पर साजिश : उन्होंने आरोप लगाया था कि जब ईवीएम को काउंटिंग सेंटर भेजा जा रहा था, तब मशीन में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ हुई.
  • इलेक्शन कमीशन को घेरा : उन्होंने सीधे तौर पर इलेक्शन कमीशन पर साजिश रचने और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया था.

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Garga Chatterjee Arrested: भ्रामक पोस्ट से माहौल बिगाड़ने की कोशिश

पुलिस का कहना है कि गार्गा चटर्जी द्वारा सोशल मीडिया पर किये गये पोस्ट न केवल भ्रामक थे, बल्कि वे समाज को अशांत करने वाले थे. चुनाव जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बिना किसी सबूत के तथ्य पेश करना और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना कानून की नजर में अपराध है. साइबर सेल ने इन पोस्ट्स को ट्रैक किया और पाया कि इससे जनता के बीच भ्रम फैल रहा था.

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कौन हैं गार्गा चटर्जी?

गार्गा चटर्जी ‘बांग्ला पक्खो’ नाम का एक संगठन (NGO) चलाते हैं, जो अक्सर भाषाई और क्षेत्रीय मुद्दों पर अपनी राय रखने के लिए चर्चा में रहता है. हालांकि, इस बार चुनाव आयोग और ईवीएम को लेकर किये गये उनके दावों ने उन्हें कानूनी मुश्किल में डाल दिया है. कोलकाता पुलिस अब उनसे कड़ाई से पूछताछ करेगी, ताकि इस साजिश के पीछे के अन्य पहलुओं का पता लगाया जा सके.

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By Mithilesh Jha

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