बंगाल में 5 रुपये में मिलेगा ‘मछली-चावल’, सीएम शुभेंदु अधिकारी का गरीबों के लिए ये खास प्लान

Suvendu Adhikari: सरकार द्वारा अब मछली और चावल का भोजन 5 रुपये में परोसने के कथित निर्णय को जनता को आश्वस्त करने और साथ ही कल्याणकारी गतिविधियों को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया एक राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. सरकारी सूत्रों ने बताया कि इस फैसले को आंतरिक रूप से मंजूरी मिल चुकी है और जल्द ही इसे लागू किए जाने की उम्मीद है.

Suvendu Adhikari: कोलकाता. पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद बनी नई सरकार के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी राज्य में आम जनता के लिए मछली-भात की एक नई योजना लाने वाले है, जिसके तहत लोगों को 5 रुपये में मछली-चावल खिलाया जाएगा. सरकारी कैंटीनों में मछली चावल को शामिल करने का यह प्रस्ताव बंगाल में सार्वजनिक खाद्य वितरण प्रणाली में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और राजनीतिक बदलाव का प्रतीक माना जा रहा है.

सरकारी रियायती कैंटीनों में लागू होगी योजना

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी को लेकर टीएमसी ने दावा किया था कि बीजेपी सत्ता में आ जाएगी तो फिर राज्य में मांस-मछली का खान-पान बंद हो जाएगा. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सत्ता संभालते ही इस विषय पर एक खास प्लान तैयार किये हैं. यह योजना बंगाल भर में चल रही सरकारी रियायती कैंटीनों के मौजूदा नेटवर्क के माध्यम से शुरू की जाएगी. ये कैंटीनें वर्तमान में दिहाड़ी मजदूरों, श्रमिकों,कों परिवहन कर्मचारियों,कम आय वाले परिवारों और शहरी गरीबों को कम लागत पर भोजन उपलब्ध कराकर उनकी जरूरतों को पूरा करती हैं.

मछली बंगालियों की सांस्कृतिक पहचान

बंगाल के लोगों के लिए मछली महज भोजन नहीं है, बल्कि एक पहचान है. लोकप्रिय बंगाली मुहावरा ‘माछे-भाते बंगाली’ जिसका अर्थ है, बंगाली मछली और चावल पर जीते हैं, आर्थिक वर्गों के बावजूद बंगाली परिवारों में मछली के महत्व को दर्शाता है. इसलिए सरकार द्वारा मछली और चावल का भोजन अत्यंत रियायती दर पर उपलब्ध कराने को एक कल्याणकारी उपाय बन सकती है. शुभेंदु अधिकारी की सरकार यह निर्णय राजनीतिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान मांसाहार एक असामान्य, लेकिन प्रमुख चुनावी मुद्दा था, जिसके चलते बीजेपी को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी. यही मछली बीजेपी के कई नेताओं ने कैमरे पर भी खाई थी.

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बीजेपी ने खारिज किए थे ममता की पार्टी के आरोप

बीजेपी के कई नेता और उम्मीदवार सार्वजनिक रूप से चुनाव प्रचार के दौरान मछली खाते, मछली बाजारों का दौरा करते और मछुआरों से बातचीत करते हुए देखे गए, जिससे यह संदेश गया कि पार्टी का बंगाल की खान-पान की आदतों में हस्तक्षेप करने का कोई इरादा नहीं है. सरकार बनने के बाद, कई जिलों में बीजेपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने “माछ-भात” के सामुदायिक भोज के साथ चुनावी जीत का जश्न मनाया, जिससे यह संदेश और मजबूत हुआ कि बंगाली खान-पान की संस्कृति को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा.

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Published by: Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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