जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान में शुरू हुई हाथी सफारी

घास के मैदानों से लेकर सफारी मार्ग तक सब कुछ प्रभावित हुआ था.

कोलकाता. जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान एक बड़ी आपदा के सदमे से उबरने के बाद आखिरकार सामान्य स्थिति में लौट आया है. भूटान सीमा पर स्थित तोरसा नदी में आयी भीषण बाढ़ और डोलोमाइट मिश्रित गाद के कारण एक सींग वाले गैंडों का यह अभयारण्य क्षतिग्रस्त हो गया था. घास के मैदानों से लेकर सफारी मार्ग तक सब कुछ प्रभावित हुआ था. आखिरकार सोमवार से हाथी सफारी फिर से शुरू हो गयी. यह खबर सामने आते ही पर्यटक उत्साहित हो गये. स्थानीय पर्यटन व्यवसायियों ने भी राहत की सांस ली. जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान के डीएफओ प्रवीण कासवान ने कहा कि आपदा में क्षतिग्रस्त हुए सफारी मार्ग, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे की पूरी तरह से मरम्मत कर ली गयी है. अब पर्यटकों के लिए हाथी सफारी का सुरक्षित आनंद लेने में कोई बाधा नहीं है. पांच अक्तूबर की आपदा में सैकड़ों हेक्टेयर घास के मैदान जलमग्न हो गये थे. वन्यजीव अभयारण्य कीचड़ से भर गया था. पुल ढह गये थे और सफारी मार्ग बंद कर करना पड़ा था. मदारीहाट और तीती मार्गों को विशेष रूप से सबसे अधिक नुकसान हुआ था, जहां चार पुल बह गये थे. दूसरी ओर कोडालबस्ती, शालकुमार और चिलपाटा मार्गों को अपेक्षाकृत कम नुकसान हुआ था, इसलिए मरम्मत कार्य शीघ्र पूरा कर जिप्सी सफारी को पहले ही शुरू कर दिया गया था. अब सभी बाधाओं को पार करते हुए हाथी सफारी भी उसी मार्ग से वापस आ रही है. हाथी सफारी यात्रा मदारीहाट, शालकुमार और कोडालबस्ती के तीन प्रवेश द्वारों से शुरू होगी. पर्यटकों के साथ प्रशिक्षित कुनकी हाथियों का एक दल भी होगा, जिनमें से चार मदारीहाट में, एक कोडालबस्ती में और दो शालकुमार में होंगे. इसके अलावा सोमवार से मदारीहाट द्वार से कार सफारी शुरू हुई, जिससे पर्यटन सुविधाओं का और अधिक विस्तार होगा. लंबे समय से बंद सफारी के कारण स्थानीय होटल मालिक, गाइड और ड्राइवर आर्थिक रूप से तबाह हो चुके थे. ऐसे में वन विभाग के इस फैसले से उन्हें एक नयी शुरुआत की उम्मीद जगी है. गौरतलब है कि जलदापाड़ा न केवल गैंडों का निवास स्थान है, बल्कि प्रकृति और वन्य जीवन का भी एक अनूठा मिलन स्थल है, इसलिए इस सफारी का फिर से शुरू होना केवल पर्यटन सेवाओं की शुरुआत भर नहीं है, बल्कि उत्तर बंगाल के लोगों और पर्यावरणविदों के लिए एक अच्छी खबर है.

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Author: GANESH MAHTO

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