इच्छा के विरुद्ध लड़ाया गया चुनाव, हार पर नहीं है कोई पछतावा : दिलीप घोष

घोष ने कहा कि वह अपनी इच्छा के विरुद्ध बर्दवान-दुर्गापुर से चुनाव लड़ने उतरे थे.

जीतेश बोरकर, खड़गपुर

वर्ष 2019 में मेदिनीपुर लोकसभा सीट पर करीब 89 हजार वोटों से जीतने वाले दिलीप घोष 2024 में बर्दवान-दुर्गापुर से लगभग एक लाख 37 हजार वोटों से हार गये थे. भाजपा नेता ने इस हार के पीछे साजिश का आरोप लगाया है. मंगलवार को खड़गपुर में पार्टी कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने फिर कई बड़े बयान दिये. घोष ने कहा कि वह अपनी इच्छा के विरुद्ध बर्दवान-दुर्गापुर से चुनाव लड़ने उतरे थे.

उन्होंने बताया कि पहली बार किसी अपरिचित जमीन पर लड़ाई लड़ते हुए उन्हें हार का सामना करना पड़ा. उनका कहना है कि पार्टी के अनुरोध पर ही वह तृणमूल के कीर्ति आजाद के खिलाफ मैदान में उतरे थे. दिलीप घोष ने कहा, “पार्टी ने कहा कि चुनाव लड़ना है, इसलिए मैं लड़ा. मैं खुद उस सीट से लड़ना नहीं चाहता था.” उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पार्टी भविष्य में दोबारा टिकट देगी तो, वह चुनाव जरूर लड़ेंगे. फिलहाल वह एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में संगठन के लिए काम करते रहेंगे. हार के कारणों पर उन्होंने कहा, “राजनीति में कुछ भी संभव है. क्या हुआ, किसने क्या किया, इसकी समीक्षा के बाद ही सब स्पष्ट होगा. प्रदेश नेतृत्व केंद्रीय नेतृत्व के साथ बैठकर चर्चा करेगा. अभी मैं कुछ नहीं कह सकता.”

पत्रकार वार्ता से पहले घोष ने एक्स पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का एक उद्धरण साझा किया, जिसमें पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की महत्ता पर जोर दिया गया था. उन्होंने संकेत दिया कि पुराने कार्यकर्ता ही जीत की गारंटी हैं और उन्हें तोड़ा नहीं जा सकता. दिलीप घोष ने बताया कि भाजपा ने उन्हें तीन बार उनकी इच्छा के विपरीत चुनाव लड़ाया. 2016 में खड़गपुर सदर विधानसभा, 2019 में मेदिनीपुर लोकसभा और 2024 में बर्दवान-दुर्गापुर से. उन्होंने कहा, “अगर पार्टी दोबारा कहेगी, तो मैं फिर से चुनाव लड़ूंगा.”

यह पूछे जाने पर कि क्या खड़गपुर सदर के विधायक हिरन के साथ उनकी कोई राजनीतिक खींचतान है, दिलीप घोष ने कहा, “हिरन हमारे मौजूदा विधायक हैं. कौन कहां से टिकट पायेगा, यह संसदीय समिति तय करती है. यही प्रक्रिया सभी 294 सीटों पर लागू होती है.” उन्होंने दावा किया कि मेदिनीपुर में भाजपा संगठन बेहद मजबूत है. दूसरी ओर, खड़गपुर में भाजपा के नये कार्यालय के उद्घाटन को लेकर तृणमूल के मेदिनीपुर जिला संगठन अध्यक्ष सुजॉय हाजरा ने कटाक्ष किया. उन्होंने कहा, “दिलीप घोष को मेदिनीपुर आने से डर लगता है, इसलिए वह खड़गपुर में काम कर रहे हैं. लोगों को इन बातों में कोई दिलचस्पी नहीं है. बंगाल भाजपा अब शुभेंदु अधिकारी की जेब में है.”

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Author: GANESH MAHTO

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