सैलानियों के लिए दुर्गापूजा सबसे अधिक पसंदीदा उत्सव

स्काईस्कैनर ने पेश की सर्वे रिपोर्ट

कहा – 2025 में 10 में से 8 भारतीय संस्कृति की खोज में यात्रा करने का बना रहे प्लान

कोलकाता. पश्चिम बंगाल की दुर्गापूजा, सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए आकर्षण का केंद्र है. पूजा के दौरान यहां देशी-विदेशी सैलानियों की संख्या काफी अधिक हो जाती है. 2025 में भारतीय पर्यटकों में नया ट्रेंड देखने को मिला है, लोगों के बीच सांस्कृतिक पर्यटन के प्रति रूचि बढ़ी है. प्रमुख ग्लोबल ट्रैवल ऐप, स्काईस्कैनर ने अपनी सांस्कृतिक पर्यटन रिपोर्ट जारी की है. इसमें भारतीय सैलानियों के बीच विश्वसनीय स्थानीय विरासत, परंपराओं एवं अनुभवों की खोज करने की बढ़ती इच्छा प्रदर्शित हुई है. इस रिपोर्ट के अनुसार, 82 प्रतिशत भारतीय सैलानी ऐसे स्थानों की यात्रा करना चाहते हैं, जो उन्हें सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करें. युवा पीढ़ी में मिलेनियल्स (84 प्रतिशत) और जेन जी (80 प्रतिशत) की सांस्कृतिक अनुभवों की ओर दिलचस्पी बढ़ रही है. 76 प्रतिशत भारतीय सैलानियों ने किसी सांस्कृतिक समारोह में शामिल होने के लिए अपने सफर की योजना में परिवर्तन किया, जिससे प्रदर्शित होता है कि परंपरा और त्योहार अब छुट्टियों के निर्णय में पूरक गतिविधियां नहीं, बल्कि मुख्य कारण बन गयी हैं. सांस्कृतिक पर्यटन में त्योहारों के प्रति लोगों का आकर्षण सबसे अधिक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय त्योहार सैलानियों को सबसे ज्यादा आकर्षित करते हैं. आधे से अधिक भारतीय सैलानी (55 प्रतिशत) ने स्थानीय त्योहारों, मेलों या सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने में रुचि दिखायी है. कोलकाता में दुर्गापूजा (53 प्रतिशत), बरसाना की लट्ठमार होली (51 प्रतिशत) और केरला में ओनम (35 प्रतिशत) सर्वोच्च सांस्कृतिक अनुभव हैं, जिनमें इस साल भारतीय सैलानी शामिल होने के लिए सबसे ज्यादा उत्सुक हैं. त्योहारों के अलावा, 53 प्रतिशत सैलानी ऐतिहासिक शहरों, जैसे जयपुर और वाराणसी की यात्रा करना चाहते हैं, जबकि 39 प्रतिशत सैलानी यूनेस्को वर्ल्ड हैरिटेज साइट्स, जैसे आगरा का ताजमहल और कर्नाटक का हंपी देखना चाहते हैं. स्काईस्कैनर के डेटा में सामने आया कि भारत के सबसे बड़े सांस्कृतिक शहरों में से एक, वाराणसी के लिए की जाने वाली सर्च में पिछले साल के मुकाबले साल 2025 में 76 प्रतिशत वृद्धि हुई है. वहीं, अपने त्योहारों एवं परंपराओं, वास्तुकला के वैभव और स्थानीय विरासत के लिए मशहूर केरल (32 प्रतिशत) और राजस्थान (30 प्रतिशत) भी भारत में सांस्कृतिक राजधानियों के रूप में उभरे हैं.

क्या कहना है विशेषज्ञों का

इस संंबंध में स्काईस्कैनर ट्रैवल ट्रेंड्स एंड डेस्टिनेशन एक्सपर्ट, नील घोष ने कहा कि उनकी रिपोर्ट में सामने आया है कि 71 प्रतिशत सैलानी अपने परिवार के साथ यात्रा करना पसंद करते हैं. 62 प्रतिशत अपने दोस्तों के साथ तथा 56 प्रतिशत अपने पति या पत्नी के साथ सफर पर जाना चाहते हैं. इस रिपोर्ट में सामने आया कि हर 10 में से लगभग चार सैलानी विरासत ग्राम स्थलों या ईको-सांस्कृतिक समुदायों की खोज पर निकलना पसंद करते हैं. वहीं, 38 प्रतिशत अलग-अलग स्वाद का अनुभव लेने के लिए सफर करते हैं, जिससे स्थानीय व्यंजनों की ओर ऐतिहासिक रुझान प्रदर्शित होता है. पॉलिसी थिंकटैंक, पहले इंडिया फाउंडेशन की एसोसिएट फैलो डॉ अदिति रावत ने इस रुझान के बारे में कहा कि सांस्कृतिक पर्यटन भारतीय सैलानियों द्वारा अपने देश और दुनिया का अनुभव लेने का नजरिया बनता जा रहा है. सांस्कृतिक खोज के इस रुझान में आराम, लग्जरी और मौजमस्ती भी शामिल हो रहे हैं,

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Author: GANESH MAHTO

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