मुख्य बातें
Dilip Ghosh: कोलकाता : सोने के व्यापारी पर हत्या मामले में गिरफ्तार पूर्व बीडीओ प्रशांत बर्मन को रातोंरात बारासात अदालत से जमानत दे दी है. जमानत देने के पीछे बताया जा रहा है कि पुलिस ने अदालत को समय पर दस्तावेज नहीं सौंपे. अब, राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने इस घटना में पुलिस के एक वर्ग की भूमिका पर सार्वजनिक रूप से घोर आक्रोश व्यक्त किया है. उन्होंने यह सनसनीखेज दावा भी किया है कि आरोपी का पुलिस के एक वर्ग के साथ गुप्त मिलीभगत या ‘षड्यंत्र’ था. मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पुलिस की पुरानी आदतें अभी पूरी तरह नहीं बदली हैं.
पुलिस पर बरसे दिलीप घोष
अपना गुस्सा ज़ाहिर करते हुए उन्होंने कहा- मैंने पुलिस से यह भी पूछा है कि आप इन लोगों को गिरफ्तार क्यों नहीं कर रहे हैं? पुलिस इन्हें ढूंढ नहीं पा रही है. फिर भी, देखा जा रहा है कि ये लोग शाम को पुलिस के साथ बैठकर चाय पी रहे हैं. गवाह की सुरक्षा के सवाल पर दिलीप साफ ने कहा कि आरोपी रिहा होते ही हत्याएं करेंगे. वो दिन अब बीत चुके हैं. राज्य में कानून व्यवस्था खत्म नहीं हुई है, सभी सुरक्षित हैं. वहीं, दिलीप घोष ने आरजी कर मामले का मुद्दा उठाते हुए चेतावनी भरे लहजे में कहा-अगर आरजी कर फाइल को दोबारा खोला जा सकता है, तो सब कुछ नए सिरे से शुरू हो सकता है.
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नशे में गाड़ी चलाते हुए टक्कर मारने का है आरोप
आरोप है कि प्रशांत बर्मन ने न्यूटाउन की सड़कों पर नशे में गाड़ी चलाते हुए एक पैदल यात्री को टक्कर मार दी और फिर बिना गाड़ी रोके भागने की कोशिश की. उसी समय एक गवाह ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया. उसका नाम शमीम अहमद है. उसने फेसबुक लाइव प्रसारण के जरिए प्रशांत कीर्ति का मामला सबके सामने लाया. इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया, लेकिन ‘प्रभावशाली’ प्रशांत को रातोंरात रिहा कर दिए जाने के बाद क्या शमीम अहमद की सुरक्षा खतरे में है. वह कितना सुरक्षित रहेगा.
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