'बदल गयी बंगाल पुलिस की बॉडी लैंग्वेज…', दिलीप घोष का बंगाल में सत्ता बदलने की ओर इशारा

Dilip Ghosh: बंगाल में इस बार मतदान का रिकॉर्ड बना है. इस बार चुनाव आयोग के सामने मुख्य चुनौती शांतिपूर्ण मतदान कराना थी. आयोग ने बार-बार यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि मतदाता बिना किसी भय के मतदान कर सकें. मतदाताओं में विश्वास जगाने के लिए मतदान शुरू होने से काफी पहले ही बंगाल में केंद्रीय बलों की तैनाती कर दी गई थी.

Dilip Ghosh: कोलकाता: पश्चिम बंगाल के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार दिलीप घोष ने तृणमूल कांग्रेस पर तंज करते हुए कहा है कि ज्ञानेश कुमार को ‘वनिश कुमार’ कहने वाले खुद गायब होने की कगार पर खड़े हैं. इतना ही नहीं, भाजपा नेता का यह भी दावा है कि बंगाल पुलिस की बॉडी लैंग्वेज बदल गई है, तो यह समझा जा सकता है कि बदलाव जरूर आएगा. विधानसभा चुनाव के दौरान तृणमूल कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बार-बार आलोचना करते हुए उन्हें ‘वनिश कुमार’ कहा था. अब, इसी बयान को ध्यान में रखते हुए, भाजपा नेता चुनाव आयोग को पूर्ण अंक दे रहे हैं.

ज्ञानेश कुमार ने खुद को साबित किया

दिलीप ने कहा- इस बार दो चरणों में मतदान कराकर उन्होंने एक बड़ी चुनौती स्वीकार की है. उन्होंने साबित कर दिया है कि मतदान शांतिपूर्ण और ऐतिहासिक था. प्रशासन चाहे तो बहुत कुछ कर सकता है. इसके बाद उन्होंने पुलिस की जमकर तारीफ की. फिर उन्होंने कहा- सिर्फ उनकी ही बात नहीं, कल केंद्रीय अर्धसैनिक बलों ने भी अपना कर्तव्य निभाया. पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस की कार्यशैली में भी बदलाव आया है. दिलीप के अनुसार, पुलिस को एक मौका दिया जाना चाहिए. वे कुछ साबित करना चाहते हैं.

पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

ममता के पास कोई मुद्दा नहीं था

उन्होंने अच्छे मतदान के लिए मतदाताओं की प्रशंसा की. उन्होंने मतदान के संचालन के लिए ज्ञानेश कुमार की भी सराहना की. उन्होंने कहा- पंद्रह वर्षों से सत्ता में रही सत्तारूढ़ पार्टी के पास इस चुनाव में कोई और मुद्दा नहीं था. जिस दिन से ‘सर’ शब्द बोला गया, उसी दिन से यह कहा जाने लगा कि वे ‘सर’ को बर्दाश्त नहीं करेंगे. उन्होंने बीएलओ यूनियनें बनाईं, ज्ञानेश कुमार को काले झंडे दिखाए और उन्हें वापस जाने को कहा, लेकिन इन सबके बावजूद वे टस से मस नहीं हुए. उन्होंने यह साबित कर दिया. बंगालियों के मन सूखे नहीं हैं और वे तृणमूल कांग्रेस को फिर से वोट देंगे.

Also Read: बंगाल में पहचान की लड़ाई, भाजपा के ‘घुसपैठिये’ से ममता की ‘बंगाली अस्मिता’ का मुकाबला

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >