चुनाव आयोग ने ओबीसी प्रमाणपत्रों को लेकर राज्य सरकार से मांगी रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल में ओबीसी प्रमाणपत्रों और स्थायी निवास प्रमाणपत्र को लेकर चुनाव आयोग ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है.

संवाददाता, कोलकाता

पश्चिम बंगाल में ओबीसी प्रमाणपत्रों और स्थायी निवास प्रमाणपत्र को लेकर चुनाव आयोग ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है. कलकत्ता हाइकोर्ट के निर्देशानुसार, 2010-2024 के बीच रद्द किये गये पांच लाख प्रमाणपत्रों का सत्यापन 31 दिसंबर तक करना होगा. आयोग ने पीआरसी जारी करने की प्रक्रिया में धांधली की शिकायतों पर भी कड़ा रुख अपनाया है. पश्चिम बंगाल में ओबीसी प्रमाणपत्रों की वर्तमान स्थिति पर चुनाव आयोग ने राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. अदालत के आदेश के मद्देनजर आयोग यह जानना चाहता है कि वर्तमान में राज्य में ओबीसी प्रमाणपत्र किस स्थिति में हैं और रद्द किये गये प्रमाणपत्रों को लेकर अब तक क्या कार्रवाई की गयी है. बताया गया है कि हाल ही में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय ने पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के सचिव को पत्र लिखकर पूछा है कि,अदालत के आदेश के बाद, ओबीसी प्रमाणपत्र जारी करने वाली रद्द की गई अधिसूचना का प्रभाव क्या पड़ा है और वर्तमान में इन प्रमाणपत्रों का क्या स्टेटस है साथ ही रद्द किये गये ओबीसी प्रमाणपत्रों का पूरा डेटा भी आयोग ने मांगा है.

स्थायी निवास प्रमाण पत्र दिये जाने की शिकायत: आपको बता दें कि,साल 2000 में एक आदेश जारी किया गया था जिसमें ‘डोमिसाइल सर्टिफिकेट’ और ‘पीआरसी’ को एक ही श्रेणी में रखते हुए कहा गया था कि डीएम, एडीएम और एसडीओ प्रमाण पत्र जारी कर सकते हैं. यह आदेश केवल सेना और अर्धसैनिक बलों के लिए था, लेकिन अब चुनाव आयोग को शिकायत मिली है. इस पुराने आदेश की आड़ में स्थायी निवास प्रमाण पत्र दिये जा रहे हैं, जिसके बाद अब चुनाव आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से स्थायी निवासी प्रमाण पत्र के आधार को लेकर सवाल किया है.

31 दिसंबर तक लागू करने का आदेश

कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश कृष्णा राव ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि 2010 से 2024 के बीच रद्द किये गये ओबीसी प्रमाणपत्रों के ‘एसआइआर’ दस्तावेजों का सत्यापन किया जाये. आयोग को कोर्ट के इस आदेश को 31 दिसंबर तक लागू करना होगा. इस बीच चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की ममता सरकार से स्थायी निवास प्रमाण पत्र को लेकर सवाल किया है. दरअसल, चुनाव आयोग को शिकायत मिली है कि एसआइआर सुनवाई प्रक्रिया से पहले,आम लोगों को गलत तरीके से स्थायी निवास प्रमाण पत्र दिये जा रहे हैं.

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