केंद्रीय मंत्री ने बांग्लादेश से आये अल्पसंख्यकों को सीएए के तहत आवेदन का किया आह्वान

वर्ष 1955 में पासपोर्ट अधिनियम बनाया गया, जो भारत सरकार द्वारा नागरिकता कानून के रूप में लागू किया गया पहला कदम था.

कोलकाता. केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने बांग्लादेश से आये अल्पसंख्यकों, विशेष कर मतुआ समुदाय के लोगों को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए आवेदन करने का आह्वान किया. सोमवार को पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री ठाकुर ने कहा कि कुछ राजनीतिक निर्णयों के कारण, भारत का विभाजन अचानक हुआ, जिससे आम लोगों को यह पता ही नहीं चला कि विभाजन के बाद उनका क्या होगा. वर्ष 1955 में पासपोर्ट अधिनियम बनाया गया, जो भारत सरकार द्वारा नागरिकता कानून के रूप में लागू किया गया पहला कदम था. वर्षों से, विस्थापित लोगों को राहत प्रदान करने के लिए इस कानून में कई संशोधन किये गये. श्री ठाकुर ने कहा कि 2019 में भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इन शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने के लिए एक व्यापक कानून पारित किया. उन्होंने एक जुलाई, 1987 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा लाये गये कानून की आलोचना करते हुए कहा कि उक्त कानून के अनुसार, एक जुलाई, 1987 के बाद भारत में जन्मे किसी भी व्यक्ति को भारतीय नागरिक तभी माना जायेगा, जब उसके माता-पिता में से कम से कम कोई एक भारतीय नागरिक हो. इसके विपरीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में 2019 में ऐतिहासिक कानून पारित किया गया. श्री ठाकुर ने आगे कहा कि गृह मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि 31 दिसंबर, 2024 तक भारत में प्रवेश करने वाले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के धार्मिक अल्पसंख्यकों को देश से निकाला नहीं जा सकता है. इससे स्पष्ट है कि भारत आये शरणार्थियों को भारतीय नागरिक के रूप में मान्यता दी जायेगी. उन्होंने शरणार्थी समुदाय, मतुआ समुदाय और बांग्लादेश से आये लोगों से सीएए के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करने की अपील की. उन्होंने कहा कि ऐसा करने से वे भारत में स्थायी रूप से रह सकेंगे, नागरिकता प्राप्त कर सकेंगे और अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे.

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Author: GANESH MAHTO

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