सेल-सीएमओ के रिटायर्ड कर्मियों की उच्च पेंशन को लेकर ईपीएफओ का आदेश रद्द

कलकत्ता हाइकोर्ट ने स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की सेंट्रल मार्केटिंग ऑर्गनाइजेशन (सीएमओ) इकाई के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उच्च पेंशन देने से इनकार करने वाले ईपीएफओ के आदेश को रद्द कर दिया है.

कोलकाता.

कलकत्ता हाइकोर्ट ने स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की सेंट्रल मार्केटिंग ऑर्गनाइजेशन (सीएमओ) इकाई के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उच्च पेंशन देने से इनकार करने वाले ईपीएफओ के आदेश को रद्द कर दिया है. अदालत ने कहा कि ईपीएफओ ने उच्च पेंशन विकल्प से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के 2022 के फैसले की गलत व्याख्या की और लाभकारी कानून की भावना के खिलाफ काम किया. न्यायमूर्ति शंपा दत्त (पॉल) ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि जिन कर्मचारियों ने 31 जनवरी 2025 या ईपीएफओ द्वारा दी गयी किसी आगे की समय-सीमा के भीतर संयुक्त विकल्प प्रस्तुत किया है, उनकी अर्जी स्वीकार की जायेगी. याचिकाकर्ता सेल-सीएमओ के वे रिटायर्ड कर्मचारी थे, जिनकी संयुक्त विकल्प अर्जी ईपीएफओ ने पांच फरवरी 2025 को यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि ट्रस्ट नियम उच्च पेंशन की अनुमति नहीं देते. कर्मचारी 58 वर्ष की आयु में एक ऐसे प्रतिष्ठान से सेवानिवृत्त हुए थे, जिसे इंप्लोइज प्रोविडेंट फंड्स एक्ट, 1952 की धारा 17(1) के तहत छूट प्राप्त है.

कर्मचारियों ने बताया कि सेल-सीएमओ पीएफ ट्रस्ट ने चार अक्तूबर 2024 को ईपीएफओ को संशोधित नियम भेजे थे, लेकिन ईपीएफओ ने 21 जनवरी 2025 के पत्र में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के चार नवंबर 2022 के फैसले के बाद ट्रस्ट नियमों में किसी भी संशोधन की अनुमति नहीं दी जा सकती. इसके बाद उसी आधार पर संयुक्त विकल्प खारिज कर दिये गये. अदालत ने पीएफ प्राधिकरण द्वारा 18 जनवरी 2025 को जारी स्पष्टीकरण को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पूरी तरह खिलाफ बताया. न्यायमूर्ति दत्त (पॉल) ने कहा कि ईपीएफओ ने फैसले की अपनी व्याख्या लागू की है, जो पूरी तरह विरोधाभासी है. अदालत ने ईपीएफओ की भूमिका को कठोर शब्दों में आलोचना करते हुए कहा कि प्राधिकरण द्वारा जारी स्पष्टीकरण न केवल मनमाना है, बल्कि लाभकारी सामाजिक कल्याण कानून के उद्देश्य को ही विफल कर देता है.

न्यायमूर्ति दत्त (पॉल) ने कहा कि ईपीएफओ किसी भी तरह लाभ देने से बचने के लिए यह तक कह रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रस्ट नियमों में संशोधन किया जाये, तो भी छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों को उच्च पेंशन नहीं मिलेगी. अदालत ने इसे अस्वीकार्य, प्राकृतिक न्याय के खिलाफ और कानून की प्रक्रिया का स्पष्ट दुरुपयोग बताया. हाइकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि कर्मचारी जब भी पेंशन फंड में अंतर राशि और लागू ब्याज जमा कर देंगे, ईपीएफओ उन्हें अगले महीने से उच्च पेंशन देना शुरू करेगा.

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By BIJAY KUMAR

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