रामकृष्ण मिशन और संतों पर आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले प्रोफेसर की नियुक्ति रद्द, हाईकोर्ट ने की तल्ख टिप्पणी

Calcutta High Court Ruling: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने रामकृष्ण मिशन कॉलेज की याचिका पर सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति रद्द कर दी है. कोर्ट ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता दूसरों की भावनाओं को आहत करने की अनुमति नहीं देती.

Calcutta High Court Ruling: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने के एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. कोर्ट ने अंग्रेजी के सहायक प्राध्यापक (Assistant Professor) की नियुक्ति को रद्द करते हुए अत्यंत गंभीर टिप्पणी की. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि हर नागरिक को अपने धर्म को मानने का मौलिक अधिकार है, लेकिन इसे किसी दूसरे व्यक्ति की आस्था या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की इजाजत के रूप में नहीं माना जा सकता.

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सुनाया फैसला

यह फैसला जस्टिस देवांशु बसाक और जस्टिस मोहम्मद शब्बर रशीदी की खंडपीठ ने पश्चिम बंगाल के नरेंद्रपुर स्थित रामकृष्ण मिशन आवासीय कॉलेज (Ramakrishna Mission College) की अपील याचिका पर सुनवाई के बाद दिया.

एकल पीठ के आदेश को खंडपीठ ने पलटा

एकल पीठ ने 4 सितंबर 2025 को तमाल दासगुप्ता को संस्थान में अंग्रेजी का सहायक प्राध्यापक नियुक्त करने का आदेश कॉलेज प्रशासन को दिया था. खंडपीठ ने एकल पीठ के इस निर्देश को खारिज (रद्द) कर दिया. खंडपीठ ने इस तथ्य को रिकॉर्ड पर लिया कि पश्चिम बंगाल महाविद्यालय सेवा आयोग (WBCSC) द्वारा दासगुप्ता के नाम की सिफारिश से पहले ही उन्होंने सोशल मीडिया पर कई विवादित पोस्ट किये थे. इन पोस्ट्स में दासगुप्ता ने अन्य धर्मों, रामकृष्ण मिशन के कामकाज और मिशन के सम्मानित संतों के बारे में आपत्तिजनक विचार व्यक्त किये थे.

इसे भी पढ़ें : चुनाव आयोग को हाईकोर्ट ने लगायी फटकार, सहायक प्रोफेसर को पीठासीन अधिकारी बनाने का आदेश रद्द

नियुक्ति पाना उम्मीदवार का स्पष्ट अधिकार नहीं : कोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट में तमाल दासगुप्ता ने दलील दी थी कि कॉलेज द्वारा उन्हें नौकरी न देने का फैसला उनकी अभिव्यक्ति की आजादी और धर्म का पालन करने के मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) का हनन है. उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया.

बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Calcutta High Court Ruling: कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले की 3 मुख्य बातें

  1. संस्थान की स्वायत्तता : पश्चिम बंगाल महाविद्यालय आयोग अधिनियम-2012 के तहत, आयोग की सिफारिश के बावजूद अंतिम नियुक्ति पत्र जारी करने या न करने का अधिकार संबंधित शिक्षण संस्थान के पास सुरक्षित है.
  2. तार्किक निर्णय : कॉलेज के शासी निकाय (Governing Body) का यह फैसला कि दासगुप्ता संस्थान के माहौल और इस गरिमामयी पद के लिए उपयुक्त नहीं हैं, पूरी तरह शैक्षणिक संस्थान के सर्वोत्तम हित में था. सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर लिये गये इस निर्णय को अतार्किक या मनमाना नहीं कहा जा सकता.
  3. निष्पक्षता : अदालत ने साफ किया कि चयन प्रक्रिया में शामिल होने वाले किसी भी उम्मीदवार को केवल निष्पक्ष विचार प्राप्त करने का अधिकार है, लेकिन वह नियुक्ति पाने का कोई स्पष्ट या कानूनी दावा नहीं कर सकता.

इन परिस्थितियों में संस्थान को नियुक्ति रद्द करने का अधिकार

हाईकोर्ट ने अंत में कॉलेज प्रशासन की कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि कोई भी संस्थान ऐसे उम्मीदवार की नियुक्ति से पूरी तरह इनकार कर सकता है, बशर्ते वह फैसला ईमानदारी से, बिना किसी व्यक्तिगत द्वेष के और संस्थान के कल्याण के लिए लिया गया हो.

इसे भी पढ़ें

440 करोड़ पर किसका हक? कलकत्ता हाईकोर्ट ने बैंक से मांगी TMC के खातों की जानकारी

लिव-इन रिलेशन पर कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, निचली अदालत के फैसले को किया खारिज

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >