जरूरी कंपोजिट ग्रांट व शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं बंगाल के स्कूल

कॉन्फ्रेंस का औपचारिक उद्घाटन निवेदिता यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ ध्रुबज्योति चटर्जी ने किया

एडवांस्ड सोसाइटी फॉर हेडमास्टर्स एंड हेडमिस्ट्रेसेस का राज्य सम्मेलन संपन्न कोलकाता. एडवांस्ड सोसाइटी फॉर हेडमास्टर्स एंड हेडमिस्ट्रेसेस (एएसएफएचएम) का ऐतिहासिक राज्य सम्मेलन यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट हॉल में आयोजित किया गया. हेडमास्टरों के इस संगठन से राज्य के सरकारी मान्यता प्राप्त, सरकारी मदद वाले और सहायता प्राप्त हाई स्कूलों और मदरसों के हेडमास्टर्स और हेडमिस्ट्रेसेस जुड़े हुए हैं, जो सबसे बड़ा गैर-राजनीतिक और सरकारी रजिस्टर्ड संगठन है. कॉन्फ्रेंस का औपचारिक उद्घाटन निवेदिता यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ ध्रुबज्योति चटर्जी ने किया. कॉन्फ्रेंस के पहले दिन एएसएफएचएम के राज्य अध्यक्ष डॉ हरिदास घटक ने स्वागत भाषण में स्कूलों से जुड़ी समस्याओं का उल्लेख किया. एडिटोरियल रिपोर्ट पेश करते हुए संगठन के राज्य महासचिव चंदन मैती ने कहा कि एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन के लिए अति आवश्यक कंपोजिट ग्रांट लंबे समय से नहीं मिली है. स्कूलों की खराब हालत सभी देख रहे हैं. राज्य भर में चार हजार से ज्यादा हेड टीचर और टीचर के पद खाली हैं, जिससे पढ़ाई बाधित हो रही है. हेड टीचर्स व टीचर्स की लंबे समय से सैलरी की कमी की समस्या का हल नहीं निकाला गया है. सरकारी कर्मचारियों, कॉलेज के प्रोफेसरों व पंचायत ऑफिस के कर्मचारियों की तरह प्राइमरी व माध्यमिक स्कूल शिक्षकों को राज्य सरकार के हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम का लाभ दिये जाने की मांग की. कार्यक्रम में संगठन के मुखपत्र ‘एएसएफएचएम जर्नल’ के छठे अंक का विमोचन किया गया. कार्यक्रम में सोशल एक्टिविस्ट शंकर हल्दर ने अपने विचार रखे. यहां मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित आरसीसीआईआईटी कॉलेज के प्रिंसिपल अनिरबन मुखर्जी ने कहा कि सही इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर, हेड टीचर, सब्जेक्ट टीचर और शिक्षा कर्मियों की नियुक्ति करके शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई का स्तर बढ़ाया जा सकता है,विशेषकर, साइंस की पढ़ाई पर खास जोर देने की जरूरत है. राज्य के अलग-अलग जिलों से लगभग एक हजार हेडमास्टर्स और हेडमिस्ट्रेस ने भाग लिया. इस तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस में कुल कुल 44 प्रतिनिधियों ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था की मौजूदा स्थिति, समस्याओं के समाधान में संगठन की भूमिका पर अपने विचार रखे. पारदर्शिता के साथ शिक्षकों और शिक्षा कर्मचारियों की तत्काल भर्ती की मांग की. संगठन के सदस्यों ने शिक्षण संस्थानों की वित्तीय सुरक्षा, स्कूलों को गौर शिक्षण कार्यों के दबाव से मुक्त रखने, छात्रों के ड्रॉपआउट को रोकने, पाठ्यक्रम को लेकर शिक्षा विभाग और शिक्षा बोर्डों की मनमानी को लेकर आवाज उठायी. कुछ हेडमास्टरों ने कहा कि शिक्षण संस्थानों के लिए मरम्मत और रखरखाव अनुदान की कमी है, जिससे भी स्कूलों को समस्या उठानी पड़ती है. यहां हायर सेकेंडरी एजुकेशन काउंसिल के प्रेसिडेंट और जादवपुर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ चिरंजीव भट्टाचार्य और वेस्ट बंगाल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन के सचिव प्रोफेसर सुब्रत घोष के अलावा आरसीसीआइआइटी कॉलेज, कोलकाता के प्रिंसिपल अनिरबन मुखर्जी ने भी सम्मेलन में अपने विचार रखे. कुछ हेडमास्टरों ने बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन द्वारा हर स्टूडेंट पर लगाये गये जुर्माने के नियम की कड़ी निंदा की. उन्होंने जुर्माने के आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की.

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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