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Bengal News : जलपाईगुड़ी: तृणमूल में फूट पड़ गई है. ममता का फूलों का बगीचा अब उजड़ चुका है. अभिषेक खुद अपनी ही पार्टी में घिर गए हैं. इस माहौल में तृणमूल से बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता घर वापसी यानी कांग्रेस में लौटने लगे हैं. टीएमसी में टूट के बाद कांग्रेस से हाथ मिलाने का रास्ता खुल गया है. पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने एक दिन पहले यही बात कही थी. हालांकि यह घर वापसी बहुत आसान नहीं है. जलपाईगुड़ी जिला कांग्रेस ने दागी तृणमूल कार्यकर्ताओं को पार्टी में शामिल करने का विरोध किया है. इस मुद्दे पर कांग्रेस में ही फूट पड़ गई है.
जलपाईगुड़ी से शुरु हुआ अभियान
तृणमूल कार्यकार्ताओं को पार्टी में शामिल करने को लेकर राष्ट्रीय कांग्रेस के जलपाईगुड़ी जिला कार्यालय, राजीव भवन में पहली सहभागिता बैठक आयोजित की गई, लेकिन पहले ही दिन माहौल बिगड़ गया. इसके साथ ही जलपाईगुड़ी का राजनीतिक परिदृश्य उथल-पुथल में आ गया. तृणमूल नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने की खबर फैलते ही युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष नबेंदु मौलिक एक दल के साथ जिला कार्यालय पहुंचे. उन्होंने इस सहभागिता का कड़ा विरोध किया.
कांग्रेस के अंदर उभरा मतभेद
तृणमूल कांग्रेस के नेता पॉल हसन प्रधान और मलय रॉय घासफुल छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए. दोनों तृणमूल जिला समिति के सदस्य थे. उनके शामिल होने की खबर मिलते ही युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष नबेंदु मौलिक मौके पर पहुंचे. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि युवा कांग्रेस या छात्र परिषद नेतृत्व को इन दागी तृणमूल नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने की कोई जानकारी नहीं है. इन दागी तृणमूल नेताओं को अंधेरे में रखकर कांग्रेस में शामिल किया जा रहा है. उनकी पार्टी में शामिल होने के संबंध में बैठक के बाद कोई लिखित निर्णय नहीं लिया गया था. इसलिए, यह शामिल होना अवैध है.
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राज्य स्तार पर हुआ फैसला
युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष नबेंदु मौलिक ने कहा कि युवा कांग्रेस इसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करेगी. जरूरत पड़ने पर युवा कांग्रेस इसे रोकने के लिए अकेले कार्रवाई करेगी. दूसरी ओर, जलपाईगुड़ी जिला कांग्रेस अध्यक्ष अमित भट्टाचार्य ने कहा- जो भी किया गया है, वह प्रांतीय नेतृत्व के निर्देशों के अनुसार किया गया है. यह निर्णय युवा कांग्रेस के नेताओं को सूचित करने के बाद लिया गया है. कांग्रेस के दोनों पक्षों के बीच उभरे मतभेदों के कारण तृणमूल के कुछ नेताओं की घर वापसी नहीं हो पायी है, लेकिन कई कार्यकर्ता कांग्रेस में लौट आये हैं.
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