स्कूल सेवा आयोग ने दागी अभ्यर्थियों के आवेदन को कर दिया खारिज

एसएससी ने कहा कि जिनके आवेदन खारिज कर दिये गये हैं, वे वेबसाइट पर लॉग इन करके अस्वीकृति का कारण देख सकते हैं.

एसएलएसटी प्रोविजनल एडमिट अपलोड कोलकाता. राज्य में शिक्षक नियुक्ति भ्रष्टाचार के मद्देनजर स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) ने एक और बड़ा कदम उठाया है. अदालत के फैसले के बाद, आयोग ने 2016 की पहली एसएलएसटी परीक्षा में ””टेंटेड”” चिह्नित सैकड़ों अभ्यर्थियों के आवेदन खारिज कर दिये हैं. दूसरी एसएलएसटी (2025) के लिए अंतिम प्रवेश पत्र अपलोड कर दिये गये हैं, लेकिन कई अभ्यर्थी इससे बाहर हो गये. एसएससी ने कहा कि जिनके आवेदन खारिज कर दिये गये हैं, वे वेबसाइट पर लॉग इन करके अस्वीकृति का कारण देख सकते हैं. स्कूल शिक्षा विभाग ने आयोग के इस कदम को अभूतपूर्व बताया है. अधिकारियों के अनुसार, राज्य की नियुक्ति प्रक्रिया में अस्वीकृति का इतना स्पष्ट कारण बताना दुर्लभ है. संयोग से, 2023 में भर्ती भ्रष्टाचार के आरोप में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 26 हजार शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों की नौकरियां रद्द कर दी गयी थीं. इनमें से 17,206 शिक्षक थे. बाद में अदालत ने 15,403 योग्य अभ्यर्थियों को इस साल 31 दिसंबर तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी. हालांकि, शेष अभ्यर्थियों के मामले में, रद्द करने का निर्णय केवल उन लोगों के लिए प्रभावी हुआ है, जिन्हें शून्य अंक प्राप्त करने के बावजूद नियुक्ति पत्र मिले, या जिन्होंने समाप्त हो चुके पैनलों के माध्यम से काम किया. कानूनी समुदाय के एक वर्ग के अनुसार, इस तरह से प्रोविजनल एडमिट कार्ड पर रद्द करने की सूची प्रकाशित करके, आयोग दरअसल भविष्य में होने वाले मुकदमों का रास्ता रोकने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि अब तक एसएससी अदालत में यह दावा करता रहा था कि लिखित और साक्षात्कार के बाद बिना सत्यापन के अयोग्य अभ्यर्थियों की पहचान करना संभव नहीं है. अब वे कह सकते हैं कि भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों के एडमिट कार्ड पहले ही रद्द किये जा चुके हैं. एसएससी के अध्यक्ष सिद्धार्थ मजूमदार इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते. हालांकि, एसएससी के नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अभ्यर्थियों की योग्यता के सत्यापन की प्रक्रिया यहीं समाप्त नहीं होती. यह सत्यापन न्यायालय के आदेश और आयोग के नियमों के अनुसार भौतिक या ऑनलाइन सत्यापन और उसके बाद होने वाली काउंसेलिंग में भी जारी रहेगा.

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By GANESH MAHTO

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