कसबा लॉ कॉलेज ने गवर्निंग बॉडी मीटिंग से संबंधित दस्तावेज सीयू को सौंपे

साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज (कसबा लॉ कॉलेज) की ओर से गवर्निंग बॉडी मीटिंग से संबंधित दस्तावेज कलकत्ता विश्वविद्यालय (सीयू) को सौंपे गये हैं. कलकत्ता यूनिवर्सिटी के एक अधिकारी ने जानकारी दी कि वे गत वर्ष दो जुलाई को हुई गवर्निंग बॉडी मीटिंग के प्रस्ताव की जांच करेंगे, जिसमें आरोपी मनोजीत मिश्रा की अस्थायी कर्मचारी के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दी गयी थी.

कोलकाता.

साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज (कसबा लॉ कॉलेज) की ओर से गवर्निंग बॉडी मीटिंग से संबंधित दस्तावेज कलकत्ता विश्वविद्यालय (सीयू) को सौंपे गये हैं. कलकत्ता यूनिवर्सिटी के एक अधिकारी ने जानकारी दी कि वे गत वर्ष दो जुलाई को हुई गवर्निंग बॉडी मीटिंग के प्रस्ताव की जांच करेंगे, जिसमें आरोपी मनोजीत मिश्रा की अस्थायी कर्मचारी के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दी गयी थी. कसबा लॉ कॉलेज ने पिछले दो वर्षों में अपनी गवर्निंग बॉडी मीटिंग से संबंधित दस्तावेज सीयू को सौंप दिये हैं. ध्यान रहे कि गत बुधवार को कलकत्ता यूनिवर्सिटी की एक टीम ने उस लॉ कॉलेज का दौरा किया, जहां 25 जून को एक छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ था. टीम ने अन्य बातों के अलावा उस गवर्निंग बॉडी मीटिंग का विवरण भी मांगा, जिसमें सामूहिक बलात्कार के मुख्य आरोपी मनोजीत मिश्रा की अस्थायी कर्मचारी के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दी गयी थी. सीयू की कार्यवाहक कुलपति शांता दत्ता दे ने कॉलेज से आवश्यक विवरण प्रस्तुत करने को कहा, जिसकी जांच यूनिवर्सिटी की टीम एक दिन के भीतर जांच करेगी. सीयू के रजिस्ट्रार देबाशीष दास ने कहा कि टीम ने 450 पृष्ठों के दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी, ताकि तथ्यों को सही तरीके से समझा जा सके.

सीयू के एक अधिकारी ने कहा कि वे दो जुलाई, 2024 को हुई शासी निकाय की बैठक के प्रस्ताव की जांच करेंगे, जिसमें मिश्रा की नियुक्ति को अस्थायी कर्मचारी के रूप में मंजूरी दी गयी थी. पुलिस ने बताया कि मनोजीत मिश्रा पर महिलाओं के उत्पीड़न, मारपीट और कॉलेज की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने सहित कई पूर्व मामलों में आरोप-पत्र दाखिल किया जा चुका है. हम यह जानना चाहते हैं कि शासी निकाय ने उक्त आरोपी मोनोजीत, जिसकी कई गिरफ्तारियों के बाद पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर के रूप में पहचान की है, को अस्थायी कर्मचारी के रूप में नियुक्त करना क्यों उचित समझा. विश्वविद्यालय यह जानना चाहेगा कि नियुक्ति को मंजूरी मिलने के दौरान शासी निकाय में विश्वविद्यालय द्वारा नामित दो सदस्यों की क्या भूमिका थी. क्या शासी निकाय द्वारा नियुक्त किये जा रहे सदस्यों के रिकॉर्ड का कोई पुलिस सत्यापन किया गया था? विश्वविद्यालय को मिले दस्तावेज़ में शासी निकाय के गठन का विवरण भी है. सीयू के एक अधिकारी ने कहा कि वे शासी निकाय के गठन की जांच कर रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि निकाय का गठन कब और कैसे हुआ. हमें आरोप मिले हैं कि कसबा स्थित लॉ कॉलेज के शासी निकाय का पुनर्गठन नहीं किया गया. हम दस्तावेजों से यह पता लगाना चाहते हैं कि क्या यह आरोप सही है. सीयू के एक अधिकारी ने बताया कि उन्हें शासी निकाय के कुछ सदस्यों से छात्रों के अवैध प्रवेश की शिकायतें मिली हैं.

तस्वीर विकृत कर वायरल करने के मामले में राजन्या ने कोलकाता पुलिस से की शिकायत

कोलकाता. कसबा स्थित लॉ कॉलेज में एक छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म की घटना प्रकाश में आने के बाद ही तृणमूल छात्र परिषद से निष्कासित राजन्या हाल्दार ने सत्तारूढ़ दल के छात्र संगठन के नेताओं व कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाये थे. उन्होंने आरोप लगाया था कि एआइ तकनीक का प्रयोग कर उसकी तस्वीर विकृत कर उसे वायरल किया गया था. इस आरोप के बाद अब हाल्दार ने मामले को लेकर सोनारपुर थाना और कोलकाता पुलिस के साइबर सेल में शिकायत दर्ज करायी है.

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Published by: Bijay kumar

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