पूर्व जस्टिस अभिजीत गांगुली की शरण में प्रभावित शिक्षक

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में स्कूल सर्विस कमीशन (एसएससी) के माध्यम से की गयी नियुक्तियों को रद्द कर दिया है. इसकी वजह से राज्य के करीब 26 हजार शिक्षक व गैर-शिक्षा कर्मचारी बेरोजगार हो गये हैं.

एसएससी कार्यालय में हाइकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश व भाजपा सांसद अभिजीत गांगुली और उनके साथियों के साथ दुर्व्यवहार का आरोपसंवाददाता, कोलकातासुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में स्कूल सर्विस कमीशन (एसएससी) के माध्यम से की गयी नियुक्तियों को रद्द कर दिया है. इसकी वजह से राज्य के करीब 26 हजार शिक्षक व गैर-शिक्षा कर्मचारी बेरोजगार हो गये हैं. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नेताजी इंडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में योग्य उम्मीदवारों को हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया है. इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से प्रभावित शिक्षक मंगलवार को कलकत्ता हाइकोर्ट के पूर्व जस्टिस व भाजपा सांसद अभिजीत गांगुली से मिलने पहुंचे और उनसे कानूनी सलाह देने की मांग की. इससे पहले सोमवार को नेताजी इंडोर स्टेडियम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने बड़ी संख्या में नौकरी से हटाये गये शिक्षक-शिक्षिकाओं ने अपनी मांगें रखी थीं. वहां उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें एक योग्य वकील की जरूरत है, जो उनके मामले को मजबूती से आगे बढ़ा सके. इसी पृष्ठभूमि में अब उम्मीदवारों का एक वर्ग पूर्व न्यायाधीश अभिजीत गांगुली से कानूनी मार्गदर्शन लेने का निर्णय लिया है. इस संदर्भ में पूछे जाने पर अभिजीत गांगुली ने कहा कि उम्मीदवारों ने मुझसे मिलने की इच्छा जतायी है और कुछ नामों की सूची भी मुझे भेजी गयी है. मैं सीधे तौर पर कानूनी सलाह नहीं दूंगा, लेकिन पार्टी के निर्देशानुसार उन्हें आगे की कार्रवाई के बारे में जानकारी दूंगा. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब 2021 में यह मामला अदालत में उठा था, तब पहली बार उनके न्यायालय में इसकी सुनवाई हुई थी. इसलिए उम्मीदवारों का विश्वास है कि इस जटिलता से बाहर निकलने का रास्ता अभिजीत गांगुली ही दिखा सकते हैं.

इसके बाद पूर्व जस्टिस अभिजीत गांगुली व भाजपा नेता कौस्तभ बागची बेरोजगार हुए शिक्षकों को लेकर एसएससी कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां एसएससी के किसी भी वरिष्ठ अधिकारी ने उनसे मुलाकात की. एसएससी कार्यालय में तैनात पुलिस के जवानों ने बताया कि एसएससी चेयरमैन कार्यालय में नहीं हैं और सचिव उनसे मिलना नहीं चाहते. इसके बाद पूर्व जस्टिस अभिजीत गांगुली ने कहा कि वह बुधवार को एक बार फिर एसएससी कार्यालय जायेंगे और चेयरमैन से मुलाकात कर योग्य व अयोग्य अभ्यर्थियों की सूची मांगेंगे.

मंगलवार को हाइकोर्ट के पूर्व जस्टिस और वर्तमान में भाजपा सांसद अभिजीत गांगुली प्रभावित अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ एसएससी कार्यालय पहुंचे. लेकिन वहां उनके साथ किये गये व्यवहार ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों का आरोप है कि आयोग के चेयरमैन से मिलने का अवसर तो मिला ही नहीं, उल्टा एसएससी सचिव ने उन्हें स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि वह इस मामले में कुछ सुनने के इच्छुक नहीं हैं. इस व्यवहार से नाराज़ होकर सांसद और उनके साथियों ने कार्यालय के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की. घटना के बाद पत्रकारों से बात करते हुए प्रतिनिधि मंडल में शामिल रहे अधिवक्ता कौस्तभ बागची ने कहा कि एक सांसद के साथ इस प्रकार का व्यवहार बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है. सचिव ने साफ कह दिया कि वह इस विषय में सुनने के इच्छुक नहीं हैं. क्या यह लोकतंत्र का अपमान नहीं है ? हम बुधवार को फिर से अपनी मांगों के साथ एसएससी कार्यालय जायेंगे और उनसे जवाब मांगेंगे. वहीं, पूर्व जस्टिस व सांसद अभिजीत गांगुली ने प्रभावित अभ्यर्थियों की आवाज़ को मजबूती से उठाने का संकल्प लिया है. उन्होंने कहा कि नियुक्ति में धांधली से पीड़ित उम्मीदवारों को न्याय दिलाना उनकी पहली प्राथमिकता है. इस मुद्दे पर वह किसी भी स्तर पर संघर्ष करने को तैयार हैं. वहीं सांसद अभिजीत गांगुली ने उच्चतम न्यायालय के आदेश के परिणामस्वरूप बेरोजगार हुए पात्र स्कूल कर्मचारियों को अपात्र कर्मचारियों से अलग करने की प्रक्रिया ओएमआर शीट की जांच से शुरू करने की मांग मंगलवार को स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) से की. न्यायमूर्ति गांगुली ने यह दावा किया कि आयोग द्वारा यह कार्य आसानी से किया जा सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक समिति बनाने के लिए तत्काल कदम उठाना चाहिए, जो ‘पात्र शिक्षकों’ की नौकरियों को बचाने के लिए एक तंत्र खोजने में मदद करेंगे. उन्होंने कहा कि अगर एसएससी ओएमआर की जांच करने में असमर्थ है, तो हम मान लेंगे कि उन पर (ऐसा न करने का) दबाव है, लेकिन उन्हें ऐसा करना ही होगा.

शिक्षा मंत्री ने भाजपा सांसद पर कसा तंज

इस पूरे घटनाक्रम के बीच राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने पूर्व जस्टिस अभिजीत गांगुली पर तंज कसा है. इस संबंध में पूछे जाने पर श्री बसु ने अभिजीत गांगुली पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब वह न्यायाधीश थे, तब राजनीतिक नेताओं जैसी भाषा बोलते थे, अब सांसद बनने के बाद न्यायाधीशों जैसी बातें कर रहे हैं. सुना है कि एक समय वह अभिनेता बनना चाहते थे. क्या उन्हें यह पता नहीं है कि किस समय कैसी भूमिका निभानी चाहिए?

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By AKHILESH KUMAR SINGH

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