कोलकाता से विकास कुमार गुप्ता की रिपोर्ट
Abhishek Banerjee: पश्चिम बंगाल विधानसभा में विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर विवाद को लेकर जारी सियासी घमासान अब कानूनी लड़ाई में बदल चुका है. तृणमूल सांसद एवं टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इस मामले में चल रही सीआईडी जांच के खिलाफ कोलकाता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने अदालत से सीआईडी द्वारा गिरफ्तारी से बचने के लिए कानूनी सुरक्षा (कवच) की मांग की है. हाई कोर्ट के जस्टिस अपूर्व सिंह रॉय की बेंच ने उन्हें मामला दर्ज करने की अनुमति दे दी है, जिस पर शुक्रवार को सुनवाई होने की संभावना है.
क्या है पूरा हस्ताक्षर विवाद?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल की ओर से शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता चुनने के लिए विधानसभा में एक पत्र सौंपा गया था. इस पत्र में पार्टी के अखिल भारतीय महासचिव के रूप में अभिषेक बनर्जी के भी हस्ताक्षर थे. आरोप है कि इस पत्र में शामिल कई विधायकों के हस्ताक्षरों में भारी गड़बड़ी पाई गई. राज्य सरकार ने इस पूरे मामले की जांच का जिम्मा सीआईडी को सौंप दिया है.
कुल 70 विधायकों के नाम शामिल
इस पत्र में विपक्ष के नेता के रूप में शोभनदेव चट्टोपाध्याय, डिप्टी लीडर के तौर पर असीमा पात्रा व नैना बनर्जी और चीफ व्हिप के रूप में फिरहाद हकीम के नाम का प्रस्ताव था. पत्र में कुल 70 विधायकों के नाम शामिल थे, लेकिन जांच में सामने आया कि इनमें से कम से कम 14 विधायकों के नाम ब्लॉक लेटर्स में लिखे थे और उनके हस्ताक्षर मौजूद नहीं थे. इसके अलावा कई अन्य विधायकों के हस्ताक्षरों में भी विसंगतियां पाई गईं.
सीआईडी की नोटिस और पार्टी से निष्कासन
इस मामले को लेकर बीते शनिवार को सीआईडी की एक टीम पूछताछ के लिए अभिषेक बनर्जी के आवास पर पहुंची थी और उन्हें नोटिस थमाया था. नोटिस के मुताबिक उन्हें सोमवार को भवानी भवन (सीआईडी मुख्यालय) में पेश होना था, लेकिन अभिषेक तय समय पर हाजिर नहीं हुए और उन्होंने जांच एजेंसी से कुछ समय मांगा था. इसके बाद बुधवार को उन्होंने सीआईडी की इस नोटिस को सीधे हाई कोर्ट में चुनौती दे दी.
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शुक्रवार को होगी सुनवाई
इस बीच, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया कि टीएमसी के ही दो विधायकों, ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने इस फर्जी हस्ताक्षर की शिकायत विधानसभा स्पीकर से की थी. इस खुलासे के तुरंत बाद ही तृणमूल कांग्रेस ने इन दोनों बागी विधायकों को पार्टी से निष्कासित कर दिया है. फिलहाल सभी की निगाहें शुक्रवार को हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं.
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