एसबीबीएस में 6399 व एमडी-एमएस में 1941 सीटें
मेडिकल कॉलेजों की संख्या 10 से बढ़ कर हुई 40
शिव कुमार राउत, कोलकाता
डॉक्टर बनने का सपना देख रहे राज्य के विद्यार्थियों के लिए अब अवसरों की कमी नहीं है. राज्य के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में लगातार मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ रही है. वर्ष 2011 के बाद राज्य में कुल 5,044 नयी मेडिकल सीटें जोड़ी गयी हैं.
केवल एमबीबीएस ही नहीं, बल्कि मेडिकल की उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी सीटों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है. ऐसे में मेडिकल की पढ़ाई का सपना देख रहे छात्र-छात्राओं को अब दूसरे राज्यों में जाकर पढ़ाई करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी.
गौरतलब है कि देश में डॉक्टरी की पढ़ाई को लेकर जबरदस्त प्रतिस्पर्द्धा है. मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में शामिल होने वाले छात्रों की संख्या सीटों की तुलना में कहीं अधिक है, खासकर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में. इसी कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार को केंद्र सरकार का भी सहयोग मिल रहा है. देश में डॉक्टरों की कमी को देखते हुए केंद्र सरकार ने 2025-26 से 2028-29 के बीच सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 10,023 नयी मेडिकल शिक्षा सीटों को मंजूरी दी है, जिन्हें अगले चरण में शामिल किया जायेगा.
इससे देश के हेल्थकेयर वर्कफोर्स को मजबूती मिलने की उम्मीद है. इस योजना के तहत राज्य में भी मेडिकल सीटों की संख्या और बढ़ेगी, जिसकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं.
वर्ष 2011 के बाद राज्य की बदली तस्वीरराज्य सरकार के अनुसार, 2011 के बाद मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक बदलाव हुए हैं. 2011 से पहले राज्य में कुल 10 मेडिकल कॉलेज थे, जिनमें नौ सरकारी और एक निजी मेडिकल कॉलेज शामिल था. 2011 के बाद मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ कर 40 हो गयी, जिनमें 24 सरकारी और 16 निजी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं.एमबीबीएस सीटों की संख्या 2011 से पहले 1,355 थी, जो अब बढ़कर 6,399 हो चुकी है. यानी लगभग 15 वर्षों में 5,044 नयी एमबीबीएस सीटें जोड़ी गयी हैं. इसी तरह पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा में भी बड़ा विस्तार हुआ है. मास्टर इन मेडिसिन (एमडी) और मास्टर इन सर्जरी (एमएस) की सीटें 900 से बढ़ कर 2025 तक 1,941 हो गयी हैं. पोस्ट डॉक्टरेट पाठ्यक्रम यानी डीएम और एमसीएच की सीटें 94 से बढ़कर 221 हो चुकी हैं. इसके अलावा राज्य को 371 डीएनबी सीटें भी प्राप्त हुई हैं. साथ ही नर्सिंग ट्रेनिंग स्कूलों की संख्या में भी वृद्धि की गयी है.
बढ़ीं सीटें, लेकिन गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल
मेडिकल सीटों में बढ़ोतरी को लेकर सर्विस डॉक्टर फोरम के कोषाध्यक्ष डॉ सपन विश्वास का कहना है कि राज्य में सीटों की संख्या तो बढ़ायी गयी है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा. कई मेडिकल कॉलेजों में शिक्षक चिकित्सकों के पद लंबे समय से रिक्त हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग भाई-भतीजावाद से संचालित हो रहा है. डॉ विश्वास के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में मेडिकल सीटें बढ़ाये जाने के बावजूद राज्य में मरीज और डॉक्टर का अनुपात अब भी संतोषजनक नहीं है. वर्तमान में राज्य में लगभग 890 मरीजों पर केवल एक चिकित्सक उपलब्ध है, जबकि सरकारी अस्पतालों की स्थिति और भी खराब है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि निजी मेडिकल कॉलेज शिक्षा के बजाय निवेश के उद्देश्य से खोले जा रहे हैं, जहां चिकित्सा और शिक्षा से अधिक कमाई पर जोर दिया जा रहा है. इसके चलते राज्य में मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है.
