नारायण मेमोरियल पर 35 लाख का जुर्माना

पहले मेडिसिन रोग विशेष की देखरखे में भर्ती कराया गया. चार दिन बाद सर्जन को रेफर किया गया.

मणिपाल को खर्च लौटाने का निर्देश

तीन निजी अस्पतालों पर आयोग की कार्रवाई

कोलकाता. वेस्ट बंगाल क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट रेगुलेटरी कमीशन ने होली से पहले तीन निजी अस्पतालों पर डंडा चलाया है. दो अस्पतालों पर भारी जुर्माना लगा है, जबकि एक को इलाज खर्च लौटाने का निर्देश दिया गया है. कमीशन ने दो मामलों में नारायण मेमोरियल हॉस्पिटल पर जुर्माना लगाया है, जबकि मुकुंदपुर स्थित एक हॉस्पिटल को इलाज खर्च लौटाने का निर्देश दिया. यह जानकारी कमीशन के चेयरमैन एवं पूर्व जस्टिस असीम कुमार बनर्जी ने सोमवार को दी.

गौरतलब है कि मनीष पांडेय नामक एक व्यक्ति ने तारातला स्थित नारायण मेमोरियल हॉस्पिटल के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी थी. इस अस्पताल में पेट दर्द और उल्टी की समस्या को लेकर एक 53 वर्षीय मरीज को भर्ती कराया गया था. मरीज को गैस्ट्रोलॉजी से संबंधित स्प्लेनेक्टोमी सर्जरी होनी थी. पहले मेडिसिन रोग विशेष की देखरखे में भर्ती कराया गया. चार दिन बाद सर्जन को रेफर किया गया. पर सर्जरी के बाद इस मरीज की मौत हो गयी.

आयोग ने जांच में पाया है कि मरीज की मौत अस्पताल की लापरवाही से हुई है. इस लिए अस्पताल पर 25 लाख का जुर्माना लगाया गया है. वहीं एक अन्य मामले में इस अस्पताल पर और लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. यहां उल्टी की शिकायत पर ही एक 60 वर्षीय महिला भर्ती करायी गयी थी. वह पैंक्रियाटाइटिस से पीड़ित थी. उसे एबीबीएस डॉ सब्यसाची पटनायक की देखरेख में भर्ती किया गया था. लेकिन मरीज को बताया गया कि चिकित्सक गैसट्रोलॉजिस्ट है. हालांकि मरीज की इआरसीपी किये जाने के दौरान उसकी मौत हो गयी. कमीशन के विशेषज्ञों ने बताया कि मरीज को एमआरसीपी अगर किया गया होता तो शायद उसकी मौत नहीं होती. कमीशन ने मृतक के परिजन को चिकित्सक के खिलाफ वेस्ट बंगाल मेडिकल काउंसिल में शिकायत दर्ज कराये जाने का सुझाव दिया है.

इसके साथ ही अस्पताल पर 10 लाख का जुर्माना लगाया है. ऐसे में दो अलग-अलग मामले में नारायण अस्पताल पर कुल 35 लाख रुपये का जुर्माना लगा है.

दूसरी ओर आयोग ने मुकुंदपुर स्थित मणिपाल अस्पताल को इलाज खर्च लौटाने का निर्देश दिया है. यहां पित्ताशय की थैली सूजन की समस्या को लेकर 66 वर्षीय एक महिला मरीज भर्ती करायी गयी थी. सर्जरी के लिए 10 दिन का पैकेज 4 लाख 87 रुपया बताया गया था. पर सर्जरी के बाद मरीज की मौत हो गयी, जबकि छठे ही दिन मरीज को 6 लाख 44 हजार रुपये का बिल थमाया गया. वहीं अस्पताल करीब 12 घंटे शव अपने कब्जे में रखा था. जांच में आयोग ने सर्जरी भी सवाल उठाया है. वहीं मरीज को डॉक्टर के खिलाफ शिकायत किये जाने का सुझाव दिया है. वहीं अस्पताल को फिलहाल पूरा इलाज खर्च यानी 6 लाख 44 हजार 153 रुपया लौटाने का निर्देश दिया है. इसके अलावा मेडिकल काउंसिल से फैसला आने के बाद आयोग अस्पताल पर जुर्माना भी लगा सकता है.

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लेखक के बारे में

Author: GANESH MAHTO

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