29 प्रतिशत ऑटो चालक ई-ऑटो अपनाने को तैयार

इंडिया क्लीन एयर नेटवर्क और स्विचऑन फाउंडेशन ने टॉलीगंज ऑटो यूनियन के साथ मिलकर ऑटो चालकों के इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) में ट्रांजिशन पर एक राउंड टेबल परिचर्चा सत्र का आयोजन किया.

इंडिया क्लीन एयर नेटवर्क व स्विचऑन फाउंडेशन ने टॉलीगंज ऑटो यूनियन के साथ मिल कर की बैठकसंवाददाता, कोलकाता

इंडिया क्लीन एयर नेटवर्क और स्विचऑन फाउंडेशन ने टॉलीगंज ऑटो यूनियन के साथ मिलकर ऑटो चालकों के इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) में ट्रांजिशन पर एक राउंड टेबल परिचर्चा सत्र का आयोजन किया. इस कार्यक्रम का उद्देश्य परिवहन के अधिक टिकाऊ तरीके को अपनाने में ऑटो चालकों की रुचि, चुनौतियों और चिंताओं का आकलन करना था. इस परिचर्चा सत्र में ऑटो यूनियनों, विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों और मोबिलिटी विशेषज्ञों सहित प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाया गया, ताकि ऑटो चालकों के बीच इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने को प्रोत्साहित करने के अवसरों और समाधानों का पता लगाया जा सके. कार्यक्रम में टॉलीगंज ऑटो यूनियन के सचिव रॉबिन बिजली, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर, ई-ऑटो डीलर और कोलकाता के ऑटो चालक शामिल हुए. वहीं, कार्यक्रम में असर सोशल इम्पैक्ट के मोबिलिटी विशेषज्ञ संजीव गोपाल, सिद्धार्थ श्रीनिवास और श्री अच्युतन वर्चुअल रूप से शामिल हुए. प्रतिभागियों ने माना कि महानगर में वायु प्रदूषण के लिए परिवहन एक प्रमुख कारक है और उन्होंने पेट्रोल, एलपीजी और सीएनजी से चलने वाले वाहनों के स्थान पर स्वच्छ विद्युत विकल्पों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया. इस दौरान किये गये एक सर्वे से पता चला कि महानगर में 29 प्रतिशत ऑटो चालक ई-ऑटो अपनाने को तैयार हैं.

इस मौके पर स्विचऑन फाउंडेशन के कार्यकारी सलाहकार और इंडिया क्लीन एयर नेटवर्क के सह-अध्यक्ष अजय मित्तल ने ऑटो चालकों को ज्ञान और संसाधनों से लैस करने के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलाव के लिए आवश्यक ज्ञान और उपकरणों के साथ ऑटो चालकों को सशक्त बनाना, इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य है. उनकी चुनौतियों को समझना और हितधारकों के साथ मिलकर काम करना एक सहायक पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में मदद करेगा, जिससे एक सहज और लागत प्रभावी बदलाव सुनिश्चित होगा.

शहरी परिवहन में ऑटो-रिक्शा की महत्वपूर्ण भूमिका

बताया गया है कि ऑटो-रिक्शा भारत भर में शहरी परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. परिवहन विभाग के अनुसार, कोलकाता में लगभग 130 पंजीकृत ऑटो रूट हैं, जहां लगभग 12,000 से अधिक पंजीकृत ऑटो रिक्शा चल रहे हैं. बताया गया है कि वर्तमान में, कोलकाता में लगभग 3,500 इलेक्ट्रिक वाहन हैं और अनुमान है कि 2030 तक इनकी संख्या बढ़कर 3,55,000 से अधिक हो जायेगी.

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By Prabhat Khabar News Desk

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