राम का कलेवर है रामचरितमानस - क्षमाराम महाराज

हावड़ा : रामचरित मानस भगवान राम का कलेवर है. यह गोस्वामी तुलसीदास के मानस में विराजमान भगवान राम का श्री विग्रह है. बालकांड राम का चरण, अयोध्याकांड राम का कटि, अरण्य कांड राम का उदर, किष्किंधा कांड राम का हृदय, सुंदर कांड राम का गर्दन, लंका कांड राम का मुखारविंद एवं उत्तर कांड राम का […]

हावड़ा : रामचरित मानस भगवान राम का कलेवर है. यह गोस्वामी तुलसीदास के मानस में विराजमान भगवान राम का श्री विग्रह है. बालकांड राम का चरण, अयोध्याकांड राम का कटि, अरण्य कांड राम का उदर, किष्किंधा कांड राम का हृदय, सुंदर कांड राम का गर्दन, लंका कांड राम का मुखारविंद एवं उत्तर कांड राम का मस्तिष्क है. बाल कांड में सात, किष्किंधा कांड में दो एवं बाकी पांच कांडों में तीन श्लोक हैं.

बालकांड के सातों श्लोकों में सातों कांडों की कथा छिपी हुई है. तुलसीदास ने विद्वत्ता के लिए नहीं अपने सुख के लिए रामचरित मानस की रचना की है. तुलसीदास ने गणेश, शक्ति, विष्णु, शंकर, सूर्य ये पांच देवों की वंदना की है. गुरु की वंदना के बाद सत्संग की वंदना तुलसीदास करते हैं. वाल्मीकि, नारद, अगस्त्य मुनि आदि सत्संग से ही सुधरे और प्रसिद्ध हुए.
शठ भी सत्संग से सुधरता हैं. मणि की तरह सत्संग है. सांप के सिर में मणि रहती है फिर भी उस पर विष का प्रभाव नहीं पड़ता. ठीक इसी तरह सत्संग करनेवालों को कुसंग का प्रभाव नहीं पड़ता है. रामचरितमानस मणियों से भरा है, जो एक रामचरित मानस का पाठ करता है, वह जीवन भर उसी का हो जाता है.
ये बातें हावड़ा सत्संग समिति के तत्वावधान में रामचरित मानस का नवान्हपाठ का परायण करते हुए सिंहस्थलपीठाधीश्वर स्वामी क्षमाराम महाराज ने फोरशोर रोड स्थित हावड़ा हाउस प्रांगण में कहीं.
श्रद्धालुओं का स्वागत मनमोहन मल्ल, निर्मला मल्ल, पुरुषोत्तम पचेरिया, पवन पचेरिया, हरिभगवान तापड़िया ने किया. महावीर प्रसाद रावत ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए बताया कि रामचरित मानस का पाठ प्रतिदिन चार जनवरी तक दोपहर सवा बारह बजे से शुरू होगा.

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