कोलकाता : 24 दिसंबर को होने वाले जादवपुर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों द्वारा राज्यपाल व चांसलर जगदीप धनखड़ को काले झंडे दिखाने की घोषणा के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन काफी दुविधापूर्ण स्थिति में रहा.
यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल अथवा चांसलर जगदीप धनखड़ को बुलाया जाये या नहीं, इसको लेकर शनिवार को आपातकालीन स्थिति में एक्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक आयोजित की गयी. जेयू प्रशासन की आेर से इसकी सूचना उच्च शिक्षा विभाग को दी गयी है.
इस बैठक में सभी सदस्यों की सहमति से यह निर्णय किया गया कि दीक्षांत समारोह का पहला भाग (स्पेशल कंवोकेशन) फिलहाल स्थगित किया जायेगा.
समारोह के पहले सत्र में विश्वविद्यालय के चांसलर राज्यपाल जगदीप धनखड़ को संबोधन भाषण देना होता है. इसके साथ ही चार महान व्यक्तियों को ऑनरिज क्वाजा की डिग्री से सम्मानित करने व विद्यार्थियों को डिग्री अवॉर्ड चांसलर द्वारा ही दिये जाने की परंपरा है, उस सत्र को स्थगित किया गया है.
यहां समारोह में पूर्व विदेश सचिव सलमान हैदर, विज्ञानी सीएनआर राव, लेखक शंख घोष व इंडियन स्टेटस्टिकल इंस्टीट्यूट की निदेशक संघमित्रा बंद्योपाध्याय को डॉक्टोरल डिग्री ‘ऑनरिज क्वाजा’ से सम्मानित किया जाना था.
इनके नाम पर पहले ही मंजूरी दे दी गयी थी. अब फिलहाल इन चारों को यह सम्मान नहीं दिया जायेगा. वाइस चांसलर प्रो. सुरंजन दास ने बताया कि छात्रों के विभिन्न संगठनों ने चांसलर जगदीप धनखड़ को काला झंडा दिखा कर बायकॉट करने के लिए उनको को ज्ञापन साैंपा था.
विद्यार्थी बहुत बड़े स्टेकहोल्डर हैं, उनको नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. हम समारोह में कोई विवाद या झमेला नहीं चाहते हैं, इसलिए फिलहाल स्पेशल कनवोकेशन को स्थगित किया गया है. वह बाद में होगा. केवल वार्षिक दीक्षांत समारोह 24 को होगा.
शनिवार को यूनिवर्सिटी कैम्पस में एक्जीक्यूटिव काउंसिल की एक बैठक वाइस चांसलर, प्रो वाइस चांसलर सहित कई सदस्य उपस्थित रहे.
इस विषय में जादवपुर विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार स्नेहामंजू बसु ने शनिवार को बताया कि वार्षिक दीक्षांत समारोह, जिसमें कुलाधिपति की उपस्थिति अनिवार्य नहीं है, का आयोजन अपने तय कार्यक्रम के अनुसार 24 दिसंबर को ही होगा.
सभी विश्वविद्यालयों में विशेष दीक्षांत समारोह के दौरान प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को मानद डॉक्टरेट डिग्री प्रदान की जाती है और इसके बाद वार्षिक दीक्षांत समारोह का आयोजन होता है. बैठक में निर्णय किया गया कि विशेष दीक्षांत समारोह को बाद में किसी समय आयोजित किया जायेगा. उसी में चार गणमान्य व्यक्तियों को डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया जायेगा.
