कोलकाता : सुदामा अपने बचपन के सखा श्रीकृष्ण से आर्थिक सहायता मांगने एक पोटली में थोड़े से भूने हुए चने लेकर गये थे, जिसे भगवान ने बहुत चाव से खाया था. लेकिन सुदामा ने हिचक की वजह से कृष्णजी से अपने लिए मदद नहीं मांगी थी. वह बिना कुछ मांगे ही उनसे विदा लेकर अपने घर लौट गये. लेकिन वापस पहुंचने पर उन्होंने देखा कि उनके टूटे फूटे झोपड़े के स्थान पर एक महल खड़ा था और उसकी गरीब पत्नी और बच्चों को अच्छे वस्त्र मिले थे.
जितना समझाया, उसके अनुसार जीवन बनायें: अनुराग कृष्ण शास्त्री

जितना समझाया, उसके अनुसार जीवन बनायें: अनुराग कृष्ण शास्त्री
Copied link
कोलकाता : सुदामा अपने बचपन के सखा श्रीकृष्ण से आर्थिक सहायता मांगने एक पोटली में थोड़े से भूने हुए चने लेकर गये थे, जिसे भगवान ने बहुत चाव से खाया था. लेकिन सुदामा ने हिचक की वजह से कृष्णजी से अपने लिए मदद नहीं मांगी थी. वह बिना कुछ मांगे ही उनसे विदा लेकर अपने […]
कृष्ण और सुदामा का प्रेम-यानी सच्चा मित्र प्रेम. सच्चे प्रेम में ऊंच-नीच, अमीरी-गरीबी नहीं देखी जाती. इसलिए आज इतने युगों के बाद भी दुनिया कृष्ण-सुदामा की सच्ची मित्रता को प्रेम प्रतीक के रूप में याद करती है. कथा व्यास ने कहा कि, जो दगा न दे वही सगा होता है और संसार में सगा और सखा केवल भगवान ही हैं. इसलिए हर जीव को भगवान के साथ रिश्ता जोड़ना चाहिए. चाहे वह किसी भी रूप में हो.
भगवान कहते हैं, जो मुझे अपना मानता है, मैं उसे सर्वस्व दे देता हूं. सुख में साथ दे, वह जीव होता है, लेकिन दुख में साथ सिर्फ ईश्वर ही देता है. कथा के सातवें समापन दिवस पर भागवत् पूर्णाहुति अवसर पर वैदिक यात्री अनुराग कृष्ण शास्त्री ने बिरला मंदिर के सामने कृष्णा निवास में कही.
कथा में रिसड़ा नगरपालिका के चेयरमैन और पार्षद विजयसागर मिश्रा, श्री काशी विश्वनाथ सेवा समिति के पूर्व सचिव व अब मार्गदर्शक राजकुमार बोथरा, उत्तर हावड़ा भाजपा के वरिष्ठ नेता अनिल गोयल, अधिवक्ता व समाजसेवी श्रीकृष्ण कुमार सिंघानिया, पत्रकार शंकर शर्मा उपस्थित थे.
सप्ताहव्यापी कथा को सफल बनाने में प्रवीण कुमार अग्रवाल, अनुपमा अग्रवाल, चांदमल अग्रवाल, सागरमल अग्रवाल, राधेश्याम गोयनका, रवि भालोटिया, रचना बगड़िया, पूजा अग्रवाल, विनोद बागडोरिया व अन्य का विशेष सहयोग रहा.