कोलकाता : उत्तर 24 परगना जिले के कांचरापाड़ा नगरपालिका प्रशासन की उदासीनता के कारण इन दिनों जहां-तहां कचरा पड़ा हुआ है. इसमें जहां आवारा पशु मुंह मार रहे हैं, वहीं विभिन्न बीमारियों के पनपने का खतरा भी बढ़ता जा रहा है. पिछले महीने सफाई कर्मचारियों के आंदोलन के बाद से ही सफाई कर्मचारियों के प्रति पालिका का ढीला रवैया इलाके के लोगों की मुसीबत बन गया है. कांचरापाड़ा नगरपालिका में 24 वार्ड हैं. आबादी डेढ़ लाख के करीब है.
नगरपालिका के चार नंबर वार्ड के कुलिया रोड और आमबागान जहां हर घर और सड़क के आस-पास कूड़े का अंबार लगा हुआ है. वार्ड एक के रेलवे कॉलोनी के पास का नजारा भी ऐसा ही है, जहां ईंटखोला जानेवाले मार्ग पर कई महीनों से कूड़े का अंबार पसरा हुआ है और उससे उठने वाली दुर्गंध से लोगों को परेशानी होती है. यही स्थिति वार्ड सात और 18 की भी है, जहां इलाके में बजबजाती नालियां डेंगू और मलेरिया को आमंत्रित कर रही हैं.
क्या कहना है लोगों का : कांचरापाड़ा नगरपालिका के 18 नंबर वार्ड निवासी राजा रजक का कहना है कि वार्ड के मानिकतला बाजार इलाके में जगह-जगह बने कूड़ेदानों में कई-कई दिनों तक कूड़ा पड़ा रहता है, जिसके दुर्गंध से लोगों को परेशानी होती है. जनप्रतिनिधि इस विषय को नजरअंदाज करते आ रहे हैं. इलाके में 10-15 लोग डेंगू की चपेट में हैं.
कांचरापाड़ा के इटखोला निवासी समीर सिंह ने कहा कि एक नंबर वार्ड के रेलवे कॉलोनी इलाके वाले सड़क मार्ग के किनारे कई माह तक कचरा जमा रहता है. नगरपालिका के कर्मचारियों व अधिकारियों को कहते-कहते थक गये हैं लेकिन कुछ नहीं हुआ.
कुलिया रोड की रहने वाली सबिता साह ने कहा कि घर के पास ही कूड़े का पहाड़ बन गया है. उससे सटा पानी का नल है जहां से हम लोग पानी लेते हैं जो बीमारियों को दावत दे रहा है.
कांचरापाड़ा के आमबागान निवासी रामवृक्ष पासवान का कहना है कि हमारे इलाके में साफ-सफाई का काम कई माह से बंद है. घर के सामने कूड़े का अंबार लगा हुआ है. जगह-जगह पर कूड़े के ढेर के कारण इलाके में सड़कों पर भी चलना मुश्किल हो गया है. गंदगी के कारण लोग बीमार पड़ रहे हैं.
समाजसेवी रामाशंकर गिरि का कहना है कि चार नंबर वार्ड में जगह-जगह कूड़े का ढेर लगा हुआ है. डेंगू और मलेरिया जैसे रोग से लोग ग्रस्त होते जा रहे हैं. स्थानीय पार्षद इससे बेखबर हैं और नगरपालिका हाथ पर हाथ रखकर बैठी है. यहां पर नगरपालिका साफ-सफाई का काम ही नहीं करवाती है.
पर्यावरण प्रेमी अमित कुमार खरवार का कहना है कि कांचरापाड़ा में कुछ जगहों पर लोगों की लापरवाही से भी गंदगी फैल रही है. साधारण लोग प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद नहीं कर रहे हैं. कहीं-कहीं पर प्लास्टिकों को जलाया जा रहा है, जिससे पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है.
कांचरापाड़ा निवासी कुंदन कुमार सिंह ( मंटू) का कहना है कि कांचरापाड़ा रेलवे स्टेशन के पास ही कूड़ेदान है लेकिन उसकी साफ-सफाई ठीक से नहीं होती. इससे वहां से निकलनेवालों को अपनी नाक बंद करने को विवश होना पड़ता है. रेलवे प्रशासन या नगरपालिका कोई कदम नहीं उठा रहे हैं.
