ईस्ट-वेस्ट मेट्रो में हो सकती एक वर्ष की देरी

इंतजार : 16.6 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट मेट्रो परियोजना जून 2022 तक पूरी होने की उम्मीद कोलकाता : ईस्ट-वेस्ट परियोजना के सुरंग में खुदाई के दौरान बहूबाजार इलाके में जमीन के नीचे सुरंग में जलवाही स्तर फट जाने से परियोजना के कार्य में एक वर्ष का विलंब होने की संभावना व्यक्त की जा रही है. अगस्त […]

इंतजार : 16.6 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट मेट्रो परियोजना जून 2022 तक पूरी होने की उम्मीद

कोलकाता : ईस्ट-वेस्ट परियोजना के सुरंग में खुदाई के दौरान बहूबाजार इलाके में जमीन के नीचे सुरंग में जलवाही स्तर फट जाने से परियोजना के कार्य में एक वर्ष का विलंब होने की संभावना व्यक्त की जा रही है. अगस्त में ड्रील अभियान के दौरान हुई घटना के बाद बहूबाजार इलाके में कई मकान जमीनदोज हो गये थे.
केएमआरसीएल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 16.6 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट मेट्रो परियोजना जून 2022 तक पूरा हो जायेगी. हालांकि यह परियोजना जून 2021 तक पूरी होनी थी. जानकारों की माने तो बहूबाजार दुर्घटना के बाद इसमें करीब छह महीने से एक साल तक का विलंब होने की संभावना है. केएमआरसीएल के एक अधिकारी ने बताया कि बहूबाजार क्षेत्र में काम दोबारा शुरू करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञ खाका तैयार कर रहे हैं.
उल्लेखनीय है कि बहूबाजार क्षेत्र में ही अगस्त में सुरंग की खुदाई के दौरान जलवाही स्तर फट गया था और इस वजह से कई मकान ढह गये थे. घटना के बाद इलाके में ईस्ट-वेस्ट टनल की दोनों सुरंगों का काम बंद कर दिया गया था. घटना के बाद इलाके के कई मकानों को खाली करवाया गया. अदालत ने बहूबाजार की घटना के बाद सितंबर में ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरीडोर के सुरंग निर्माण कार्य पर अस्थायी रोक लगा दिया था. दोनों अर्थ टनल बोरिंग मशीन की खुदाई रोक देनी पड़ी.
केएमआरसी ने रखरखाव कार्य के लिए मशीन के इस्तेमाल की इजाजत के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की. केएमआरसीएल का कहना था कि यदि मशीन को घटनास्थल से पांच मीटर नहीं हटाया गया तो मशीन स्थाई रूप से खराब हो जायेगी. केएमआरसी द्वारा दायर मामले पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश टी बी एन राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने सोमवार को केएमआरसी को बोरिंग मशीन को अन्यत्र ले जाने के लिए विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के अनुसार काम करने का निर्देश दिया. पीठ ने 16 दिसंबर तक केएमआरसी को काम पूरा होने पर एक रिपोर्ट पेश करने का भी निर्देश दिया है.
विभिन्न देशों के विशेषज्ञों की एक समिति ने 15 नवंबर को अदालत में रिपोर्ट सौंपी और कहा कि पांच मीटर तक मशीन को हटाना रखरखाव कार्य के लिए जरूरी है और यह काम उसके निरीक्षण में किया जायेगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति के सदस्य का यह सर्वसम्मत विचार है कि पांच मीटर तक मशीन हटाने से जमीन नहीं धंसेगी और फलस्वरूप धरती पर जान-माल पर प्रभाव नहीं पड़ेगा.

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